November 24, 2020

वक्त रहते नहीं संभले तो जयपुर-कोटा समेत देश के 30 शहर फंस सकते हैं संकट में

भारी जल संकट का सामना करने को मजबूर होने की आशंका

नई दिल्ली, 5 नवम्बर (एजेंसी)। जल संकट आने वाले समय में दुनिया के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन सकती है। वल्र्ड वाइड फंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 100 अति महत्वपूर्ण शहर में रहने वाले करीब 35 करोड़ों लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। रिसर्च के मुताबिक अगर जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया और उसे अनुकूल बनाने की तत्काल कोशिश नहीं की गई तो भारत के ही 30 से ज्यादा शहर भारी जल संकट का सामना करने को मजबूर होंगे। भारत के जिन 30 शहरों पर जल संकट का सबसे पहले प्रभाव पड़ेगा उसमें राजस्थान के जयपुर- कोटा समेत मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, इंदौर, अमृतसर, पुणे, श्रीनगर शहर शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक जल संकट चरम पर पहुंच सकता है और इससे करोड़ों लोग बुरी तरह प्रभावित होंगे। जिन शहरों में पानी की भारी कमी हो सकती है उसकी सूची में जयपुर 30 लाख आबादी के साथ 45वें नंबर पर है जबकि 20 लाख की जनसंख्या के साथ इंदौर 75वें स्थान पर है. जिन क्षेत्रों में अभी जल संकट 17 फीसदी तक है वहां साल 2050 तक यह बढ़कर 51 फीसदी तक हो सकता है।

कोटा अतिसंवेदनशील में
इस रिसर्च रिपोर्ट में भारत के जिन शहरों को जल संकट की वजह से अतिसंवेदनशील बताया गया है उसमें अमृतसर, पुणे, श्रीनगर, कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई कोझीकोड, वडोदरा, राजकोट, कोटा, अहमदाबाद, कोलाकता, मुंबई, भोपाल, ग्वालियर, दिल्ली, लखनऊ जैसे शहर शामिल हैं। इस अध्ययन में साल 2030 से 2050 तक के बीच जिन शहरों को जल संकट को लेकर सबसे जोखिम वाले हिस्से में रखा गया है उसमें अहमदाबाद, अमृतसर, चंडीगढ़ जैसे शहर प्रमुख हैं। बता दें कि रिसर्च करने वाली संस्था वल्र्ड वाइड फंड कंपनियों और निवेशकों को दुनिया भर में पानी की कमी, संकट, मूल्याांकन, और मूल्य निर्धारण में मदद देती है। संस्था के इंडिया प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ सेजल वोरा ने कहा कि भारत किस तरह से स्थायी जलसंकट का सामना कर रहा है और इन शहरों का भविष्य क्या हो सकता है इस पर अब गहन मंथन करने की जरूरत है। वैसे मीठे जल के संरक्षण की योजना को लेकर स्मार्ट शहर बनाने की योजना की तारीफ भी की गई है। विश्लेषण में कहा गया है कि जल का प्रबंधन और समग्र ढांचे का विकास इसमें शामिल है जिससे जल संतुलन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।