Wed. Apr 24th, 2019

वाहन में सीट बैल्ट नहीं लगाई तो ड्राइवर जिम्मेदार

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 13 अप्रैल। अगर किसी वाहन में सीट बैल्ट दी गई है तो अब यह ड्राइवर की जिम्मेदारी है कि वह सभी यात्रियों का सीट बैल्ट लगाया जाना सुनिश्चित करें। मोटर व्हीकल्स(ड्राइविंग) रेग्यूलेशन्स 2017 के अन्तर्गत ड्यूटीज ऑफ ड्राइवर एंड राइडर्स, ओवरटेकिंग, स्पीड, राइट ऑफ द वे, लेन ड्राइविंग, पार्किंग आदि के ऐसे ही नए नियमों के सम्बंध में परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ के अधिकारियों, मुख्यालय के डीटीओ, निरीक्षकों, यातायात पुलिसकर्मियों को शुक्रवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार एवं इन्सटीटयूट ऑफ रोड ट्रेफिक एजुकेशन (आईआरटीई) के संयुक्त तत्वावधान में यह प्रशिक्षण मोहनलाल सुखाडिय़ा मेमोरियल हॉल, द्वितीय तल राजस्थान चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्री, अजमेरी गेट के सभागार में दिया गया। आईआरटीई के हेड विषय विशेषज्ञ रोहित बलूजा ने प्रतिभागियों को मोटर व्हीकल्स (ड्राइविंग) रेग्यूलेशन्स 2017 के विभिन्न प्रावधानों एवं उनके सेक्शन्स की सविस्तार जानकारी दी। इसके साथ ही नए नियमों के सम्बन्ध में उनकी शंकाओं का समाधान किया। डीसीपी ट्रेफिक राहुल प्रकाश ने कहा कि फील्ड में इंप्लीमेंट करने से पहले ट्रैफिक नियम कायदों को अच्छी तरह जानना समझना जरूरी है। इसके लिए यातायात पुलिस कर्मियों को केवल पूछ और सुनकर चलने के बजाय इन नियमों के अध्ययन की आदत होनी चाहिए। एडिशनल डीसीपी यातायात सेठाराम ने उपस्थित यातायात पुलिसकर्मियों को इस प्रशिक्षण का अधिक से अधिक लाभ उठाने एवं सड़क पर यातायात नियमों की पालना करवाने का आव्हान किया।

अब हर विभाग में होगी प्रि लिटिगेशन मोनेटरिंग कमेटी

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 13 अप्रैल। राज्य सरकार की ओर से बनाई गई नई वादकरण नीति में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिससे की अनावश्यक रूप से मामले कोर्ट तक नहीं पहुंचे। इसमें शिकायतों की सुनवाई के लिए प्रत्येक विभाग में प्रि-लिटिगेशन मोनेटरिंग कमेटी का प्रावधान किया गया है। विधि विभाग की ओर से जारी पॉलिसी में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा राज्य के विरुद्ध वाद या कोई कार्रवाई संस्थित किए जाने पूर्व कोई नोटिस दिया जाता है तो उसके शीघ्र निस्तारण के लिए प्रत्येक विभाग में प्रि-लिटिगेशन मोनेटरिंग कमेटी का प्रावधान किया गया है। विभाग को पक्षकार का नोटिस प्राप्त होने पर मामला कमेटी में रखा जाएगा। इस मामले में कमेटी ही अंतिम निर्णय करेगी। कमेटी को सात दिन में विधि विभाग की राय लेना जरूरी होगा। प्रशासनिक विभाग के संयुक्त सचिव, उप सचिव या नोडल अधिकारी कमेटी के सदस्य सचिव होंगे। इस मामले में वे सात दिन में कमेटी की मीटिंग बुलाएंगे। मामले को स्पेशल सेल में भेजना है तो इसके लिए 5 दिन में मीटिंग बुलानी होगी। कमेटी के निर्णय की जानकारी पक्षकार को ई-मेल या पोस्ट के जरिए देनी होगी।