August 14, 2020

वित्तीय शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा: ऊर्जा मंत्री

राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण होगा

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 4 जुलाई। ऊर्जा मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने केन्द्र सरकार की ओर से विद्युत अधिनियम, 2003 (प्रस्तावित संशोधित), बिल 2020 को राज्यों के लिए शक्ति के विकेन्द्रीकरण का पूर्ण विरोधाभासी और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। संविधान के अनुसार बिजली क्षेत्र समवर्ती सूची में शामिल है। केन्द्र सरकार की ओर से इस प्रस्तावित बिल का बिजली क्षेत्र से सम्बंधित आदेशों, नियंत्रण और विनियमन के केंद्रीयकरण की ओर झुकाव है, इससे राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण होगा तथा इससे राज्यों की वित्तीय और संचालन शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। डॉ. कल्ला शुक्रवार को राज्यों के पॉवर एवं न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रियों की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने केन्द्रीय ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री आर.के. सिंह से विकेन्द्रीकरण की मूल भावना के विपरीत होने के कारण इस संशोधन बिल को वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा कि नियामक आयोग की शक्तियां राज्यों के पास ही रहनी चाहिए, केन्द्र को इनमें कोई दखल नहीं देना चाहिए। डॉ. कल्ला ने जयपुर में विद्युत भवन से इस वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में शिरकत की। इसमें प्रदेश के ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अजिताभ शर्मा, पी. रमेश, एके गुप्ता तथा अनिल गुप्ता सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी मौजूद रहे।

गांधी सदैव सत्ता के विकेन्द्रीकरण के पक्षधर: ऊर्जा मंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी सदैव सत्ता के विकेन्द्रीकरण के पक्षधर रहे और उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती के लिए इसे सबसे कारगर नीति की संज्ञा दी। डॉ. कल्ला ने कहा कि इस बिल के मसौदे पर उनकी कई राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों से चर्चा हुई है, जिन्होंने इस पर एतराज जाहिर किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस प्रस्तावित संशोधन बिल के बारे में राज्यों की भावना से अवगत कराने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।

प्रसारण निगमों के 26 हजार करोड़ बकाया: डॉ. कल्ला ने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री से आग्रह किया की कोविड-19 के कारण केन्द्र सरकार द्वारा नकदी संचार के लिए जो पैकेज घोषित किया गया है, उसके तहत राजस्थान डिस्कॉम्स ने सीपीएसयू उत्पादकों, आईपीपी, आरई उत्पादकों एवं सीपीएसयू टास्क के बकाया भुगतान के लिए 4 हजार 461 करोड़ की अनुमति प्राप्त कर ली है, लेकिन इस राशि से राज्य उत्पादकों के बकाया का भुगतान नहीं किया जा सका है, क्योंकि राज्य के उत्पादन और प्रसारण निगमों के 26 हजार करोड़ बकाया है, जो कुल बकाया राशि का 84 प्रतिशत है।

उपभोक्ताओं के जुड़ाव की आवश्यकता होगी
डॉ. कल्ला ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के बारे में कहा कि इसे जिस तरीके से पेश किया जा रहा है, उससे यह किसानों, राज्यों की कृषि अर्थव्यवस्था, आजीविका और आर्थिक विकास को प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि डीबीटी योजना के क्रियान्वयन के लिए इसके प्रावधानों से पहले और बाद में केन्द्र, राज्य और उपभोक्ताओं के जुड़ाव की आवश्यकता होगी, लेकिन बिल में इस दिशा में किसी प्रकार का संकेत नहीं है।