Wed. Apr 24th, 2019

वित्त मंत्रालय से रेल को धन

नई दिल्ली, (एजेंसी)। भारतीय रेलवे को वित्त मंत्रालय की ओर से राहत मिली है। वित्त मंत्रालय 5,000 करोड़ रुपये मूलधन एवं ब्याज के भुगतान के लिए सहमत हो गया है, जिसे रेलवे ने वित्त वर्ष 2018-19 की रणनीतिक रेलवे परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए अतिरिक्त बजट संसाधनों (ईबीआर) से जुटाए हैं। जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर क्षेत्र की रणनीतिक हिसाब से अहम परियोजनाएं या इन इलाकों को शेष भारत से जोडऩे वाली चल रही परियोजनाओं को रणनीतिक माना गया है। इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि यह रणनीतिक परियोजनाओं के वित्तपोषण की एकमुश्त योजना है और यह राशि 2018-19 के लिए 53,600 करोड़ रुपये के बजट समर्थन में से घटाई जा सकती है। मार्च के मध्य तक रेलवे ने पहले ही बजट समर्थन की 80 प्रतिशत राशि खर्च कर दी है। 2018-19 के पुनरीक्षित अनुमान में पूंजीगत व्यय 1,38,857.52 करोड़ रुपये था, जिसमें 53,060 करोड़ रुपये बजट समर्थन, 6,500 करोड़ रुपये आंतरिक संसाधनों से और 79,297.52 करोड़ रुपये अतिरिक्त बजट संसाधनों से जुटाए गए हैं। चालू दशक के शुरुआत में भारतीय रेलवे ने 14 परियोजनाओं को चिन्हित किया था। शुरुआती योजना के मुताबिक इनमें से करीब 10 परियोजाओं पर 66,327 करोड़ रुपये लागत आने की संभावना है। 2016 में राजग सरकार ने चीन की सीमा से सटे 4 परियोजनाओं को शामिल किया था, जिनमें 378 किलोमीटर की मिसामारी-टेंगा-तवांग लाइन, 498 किलोमीटर की बिलासपुर मनाली लेह लाइन, 227 किलोमीटर की पासीघाट तेजू रुपाई लाइन और 249 किलोमीटर की उत्तरी लखीमपुर-बामे-सिलापत्थर लाइनें शामिल हैं। रणनीतिक रेलवे लाइन की योजना को प्राथमिकता देने का एक मकसद यह भी है कि इससे सेना की टुकडिय़ों, टैंकों पर अन्य सामग्री सीमा क्षेत्र में आसानी से भेजा जा सकेगा। सरकार चाहती है कि ऐसी परियोजनाओं पर तत्काल काम शुरू हो।