November 24, 2020

वीवीआईपी की सुरक्षा दांव पर

  • प्रदेश में जैमरों की संख्या में हुई गफलत

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 24 अक्टूबर। राजस्थान में जैमरों की संख्या में हुई गफलत से वीवीआईपी सुरक्षा दांव पर लग गई है। प्रदेश में वीवीआईपी सुरक्षा के लिए नए माउंटेड व्हीकल जैमर के साथ ही 3 जैमर के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है लेकिन दो साल से खरीद की मंजूरी गृहमंत्रालय में अटकी हुई है। इसकी वजह राज्य में जैमर की संख्या और गृहमंत्रालय के रिकॉर्ड में भारी अंतर होना है। जैमर की संख्या में आए इस अंतर के कारण ही मंत्रालय जैमर खरीद की मंजूरी नहीं दे रहा है।

वीवीआईपी सुरक्षा बड़ी चुनौती
प्रदेश में बदले हालातों में वीवीआईपी सुरक्षा लगातार एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। चाहे वो आतंकवादी घटना हो या भीड़ नियंत्रण का मामला। ऐसे में वीवीआईपी को वाहनों के साथ ही जेलों में भी बदमाशों को कंट्रोल रखने के लिए जैमर लगाए जा रहे हैं। हालांकि राजस्थान में रिकॉर्ड में हुई गफलत के चलते आज जेल और वीवीआईपी सुरक्षा में सवालिया निशान लग रहा हैं। राजस्थान में व्हीकल माउंटेड जैमर की संख्या 4 बताई जा रही है जिनमें दो नकारा है। एक जैमर राज्यपाल-मुख्यमंत्री के सुरक्षा कारकेड में लगा हुआ है। कई दफा ऐसे मामले आ जाते हैं जब दो वीवीआईपी एक साथ राजस्थान आ जाएं। तब व्हीकल माउंटेड जैमर नहीं मिला। वर्ष 2018 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह,भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष एक ही दिन राजस्थान दौरे पर आए। ऐसे में इंटेलीजेंस को परेशानी आई। इसके बाद राज्य के खुफिया पुलिस बेड़े में पांच नए व्हीकल माउंटेड जैमर खरीद का प्रस्ताव भेजा गया।

सितम्बर 2018 में मिली मंजूरी
सितम्बर 2018 में एक व्हीकल माउंटेंड और दो पोर्टेबल जैमर की वित्तीय-प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई। जैमर की खरीद के लिए गृहमंत्रालय से मंजूरी मांगी गई तो उसने पुराने जैमर का रिकॉर्ड मांग लिया। एसपी इंटेलीजेंस ने बताया कि इंटेलीजेंस में आठ पोर्टेबल जैमर,जिनमें एक नकारा, चार व्हीकल माउंटेड जैमर जिनमें दो नकारा बताए गए वहीं गृहमंत्रालय की ओर से 7 पोर्टेबल जैमर,दो व्हीकल माउंटेड जैमर बताए गए। इसी तरह जेल में 2जी के 8 और 3 जी के 57 जैमर बताए गएलेकिन गृहमंत्रालय के रिकॉर्ड में इनकी संख्या 132 बताई है। जैमर की संख्या में इतना अंतर आने के बाद गृहमंत्रालय ने दो नए जैमर खरीद की मंजूरी भी नहीं दे रहा है। इधर राज्य सरकार की ओर से बार-बार पत्र लिखा जा रहा है लेकिन मंत्रालय की ओर से जैमर खरीद की स्वीकृति नहीं मिल रही है।