November 24, 2020

शहर में दिवाली पर 45 करोड़ के पटाखे बिकते हैं

धुएं से पॉल्यूशन जानलेवा स्तर तक पहुंच जाता है

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 2 नवम्बर। दो हफ्ते बाद दिवाली है, मिठाई और कपड़ों के बाद दीपावली पर सबसे ज्यादा कारोबार पटाखों का होता है। राजधानी जयपुर में दिवाली पर करीब 45 करोड़ रुपए के पटाखे बिकते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते राज्य सरकार ने इस बार दीपावली पर अस्थायी पटाखा लाइसेंस जारी करने से इनकार कर दिया है। पुलिस कमिश्नरेट के पास 1375 आवेदन आ चुके थे, राज्य सरकार से आदेश जारी होने के बाद अब इन आवेदनों को रद्द कर दिया जाएगा। पटाखा बिक्री के बाद सबसे ज्यादा चिंता एयर पॉल्यूशन को लेकर है। चूंकि कोरोना काल है तो कोविड मरीजों के साथ-साथ सामान्य इंसान को भी जान का खतरा रहता है।

हर साल 1500 लाइसेंस जारी होती है : दिवाली पर आतिशबाजी से शहर की आबोहवा इस कदर बिगड़ जाती है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से भी ऊपर चला जाता है, पॉल्यूशन का यह स्तर आम इंसान के लिए घातक होता है ऐसे में कोविड मरीजों की स्थिति तो और ज्यादा बिगड़ सकती है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.सुधीर भंडारी के अनुसार फेफड़ों में धुआं जाने से खतरा ज्यादा बढ़ जाता है, कोविड मरीजों के फेफड़ों में पटाखे के धुआं जाने से इलाज करना और मुश्किल हो जाएगा। एसएमएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक व अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ.वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि प्रदूषण व पटाखों का धुआं दोनों ही दमा, अस्थमा मरीजों पर ज्यादा अटैक करता है। अस्थमा भवन की एक्जीक्यूटिव डाइरेक्टर डॉ. निष्ठा सिंह ने बताया कि कार्बनडाइ आक्साइड, नाइट्रोजन डाइ आक्साइड, सल्फर डाइ आक्साइड जैसी खतरनाक गैसे निकलती है। इन जहरीली गैसों से अस्थमा, एलर्जिक रायनाटिस, सीओपीडी और कोविड से हुई फेफड़ों की बीमारी आईएलडी के मरीजों के लिए हानिकारक होता है। पटाखों से निकलने वाले लैड से हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रॉक का खतरा भी है। दिवाली पर हर साल पुलिस कमिश्नरेट की ओर से 1500 से ज्यादा अस्थाई लाइसेंस जारी किए जाते है। इसके अलावा 108 लाइसेंस स्थाई और 52 विस्फोटक विभाग की ओर से लाइसेंस जारी किए हुए है। इन सभी पटाखा व्यापारी हर साल दिवाली कर करीब 40 से 45 करोड़ रुपए का व्यापार करते है। इसके अलावा सहकारिता विभाग 1 से 1.5 करोड के पटाखे हर साल बेच देता है।