September 23, 2020

श्राद्ध बाद हो सकेंगे मोतीडूंगरी गणेशजी के दर्शन

18 से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोलने का प्रबंधन ने लिया निर्णय

जयपुर, 2 सितम्बर। प्रदेश में लॉकडाउन लगने के बाद से श्रद्धालुओं के लिए बंद हुए धार्मिक स्थल (मंदिर, मस्जिद, चर्च इत्यादि) अब इस माह से खुलने शुरू होंगे। ये धार्मिक स्थल यहां की प्रबंध संचालन समिति की ओर से अलग-अलग निर्णय के अनुरूप खुलेंगे। जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर की बात करें तो यहां के द्वार श्रद्धालुओं के लिए श्राद्ध बाद यानी 18 सितम्बर से खुल जाएंगे।
मोती डूंगरी महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि मंदिर खोलने से यहां कोविड-19 की सुरक्षा संबंधि सभी इंतजाम व व्यवस्थाएं की जा रही है। सरकार की ओ से जारी गाइडलाइन की पालना करते हुए श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। इसी तरह सीकर स्थित जीणमाता का मंदिर भी 15 सितंबर से आमजन के लिए खुल जाएगा। जयपुर के सुप्रसिद्ध श्री खोले के हनुमान जी मंदिर कब से खुलेगा, इसका निर्णय मंदिर प्रबंध संचालन समिति की आज शाम प्रस्तावित बैठक में लिया जाएगा।

इन मंदिरों में दर्शन के लिए लगेगा समय
जयपुर शहर के आराध्यदेव गोविंददेव जी मंदिर प्रबंधन ने मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए फिलहाल 30 सितम्बर तक बंद रखने का निर्णय किया है। इसी तरह दिल्ली बाइपास स्थित गलता तीर्थ, सीकर जिले के रींगस स्थित बाबा खाटूश्याम जी के मंदिर को भी वहां के प्रबंध संचालको ने 30 सितम्बर तक बंद रखने का निर्णय किया है।

धार्मिक स्थल खुलने से घूमने लगेगा अर्थव्यवस्था का पहिया
प्रदेश में जब से धार्मिक स्थल लॉकडाउन के बाद बंद हुए है, तब से पर्यटन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का पहिया घूमने से थम गया है। क्योंकि राजस्थान में एतिहासिक स्थल जैसे किले, बावडिय़ां, हवेलियां के अलावा पर्यटन की दृष्टि से सबसे दूसरे सबसे पसंदीदा स्थान धार्मिक स्थल है। जयपुर में गोविंद देव जी, खोले के हनुमान जी मंदिर, गणगणेश, मोती डूंगरी, सामोद वाले हनुमान जी के अलावा सवाई माधोपुर स्थित त्रिनेत्र गणेश जी, चौथ माता, करौली स्थित महावीर जी, कैलामैया, दौसा स्थित महेंदीपुर बालाजी, सीकर स्थित खाटू श्याम जी, सालासर धाम, जीण माता, बीकानेर स्थित देशनोक, राजसमंद स्थित श्रीनाथजी, चित्तौडगढ़ स्थित सांवरिया सेठ, अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह, पुष्कर सहित कई तीर्थ स्थल या धार्मिक स्थल है। यहां हर साल लाखों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक दर्शन के लिए आते है। जिससे इन क्षेत्रों में आस-पास रहने वाले हजारों परिवारों को रोजगार मिलता है।