Wed. Sep 18th, 2019

श्रीराम के पुत्र लव ने बसाया था लाहौर

मेवाड़ राजघराने का दावा

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 13 अगस्त। अयोध्या विवाद मामले में जयपुर राजवंश के खुद को वंशज बताने के बाद मेवाड़ राजघराने ने भी दावा किया है कि वह भी श्रीराम के वंशज हैं। उनके वंश का निकास श्रीराम के बेटे लव से होता है और लव ने ही लाहौर बसाया था जिसे पहले लवकोटे कहा जाता था। लव के वंशज कालांतर में आहाड़ आए जो मौजूदा मेवाड़ है और जहां सिसोदिया वंश की स्थापना की गई। मेवाड़ घराने ने कहा कि श्री राम वंशज होने संबंधी दस्तावेज जयपुर राजघराना ढाई दशक पहले ही अदालत को सौंप चुका था लेकिन उस पर आगे कुछ नहीं हुआ। अब कोर्ट ने इस पर सवाल उठाए हैं, जबकि मामला श्रीराम के वंशज होने का नहीं, बल्कि अधोध्या मंदिर का है।

मेवाड़ में 76 पीढिय़ां
उदयपुर में रह रहे मेवाड़ राजघराने के सदस्य महेंद्रसिंह मेवाड़ ने कहा कि उनका राजघराना श्रीराम के पुत्र लव का वंशज है। मेवाड़ में उनकी 76 पीढिय़ां तो इतिहास में दर्ज हैं जबकि राजघराने का इतिहास हजारों साल पुराना है। महेंद्रसिंह मेवाड़ का कहना है कि श्रीराम के वंशजों की वंशावली अयोध्या केस का मुद्दा नहीं है फिर इसकी मांग क्यों की जा रही है। जयपुर राजघराने ने तो ढाई दशक पहले ही वंशावली अदालत में पेश कर दी थी।

अयोध्या श्रीराम की राजधानी
मेवाड़ राजघराने के श्रीराम के वंशज होने का दावा इसी राजवंश के लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ ने भी जताया है। उनका कहना है कि कर्नल जेम्स टॉड ने भी अयोध्या के बारे में लिखा था। उन्होंने लिखा था कि अयोध्या श्रीराम की राजधानी रहा। उन्होंने यह भी लिखा था कि श्रीराम के बेटे लव ने लवकोटे यानी लाहौर को बसाया। कालांतर में वही राजवंश गुजरात होते हुए मेवाड़ आया। चित्तौड़ के बाद उदयपुर को इसी राजधानी बनाया। श्रीराम भी शिव के उपासक थे और मेवाड़ राजपरिवार भी भगवान शिव यानी एकलिंगनाथ का उपासक है। हम मानते हैं कि मेवाड़ का राजा भगवान एकलिंगनाथ है। सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के मसले पर चल रही सुनवाई के बीच जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से श्रीराम का वंशज होने का दावा किया गया है। पूर्व राजपरिवार की सदस्य और भाजपा सांसद दीया कुमारी ने कहा कि वे भगवान राम के वंशज हैं। उन्होंने पोथीखाना में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर इसका दावा किया है। जयपुर की पूर्व राजमाता पद्मनी देवी ने कहा कि 1992 में पूर्व महाराजा स्व. भवानी सिंह ने मानचित्र सहित सभी दस्तावेज कोर्ट को सौंप दिए थे। भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज होने से ढूंढाड़ के राजा कछवाहा कहलाने के साथ राम की 309वीं पीढ़ी में मानते हैं। जयपुर के पूर्व राजपरिवार का दावा है कि रामजन्म भूमि को लेकर सिटी पैलेस के कपड़ाद्वारा में सुरक्षित दस्तावेजों आधार पर यह साफ होता है कि अयोध्या में राम मंदिर की भूमि जयपुर रियासत के अधिकार में रही है।