November 27, 2020

सभी को कोरोना वैक्सीन की राह में अब कांच आड़े आया?

नई दिल्ली, 2 नवम्बर (एजेंसी)। कोविड-19 महामारी की शुरुआत में मास्क और सुरक्षा उपकरणों की कमी थी। अब जब कोरोना की वैक्सीन तैयार होने के करीब है तो अपने हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए सभी देशों से सामने बड़ी चुनौतियां हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों को वैक्सीन के लिए तैयारी पूरी करने को कहा है। परिवहन,कोल्ड चेन सहित वैश्विक स्तर पर बड़ी संख्या में शीशियां और अन्य सामान जुटाना भी कम मुश्किल नहीं है।

25 करोड़ लोगों को वैक्सीन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा था कि देश की योजना 20 से 25 करोड़ लोगों को जुलाई 2021 तक 40.50 करोड़ वैक्सीन के जरिये प्रतिरक्षा देने की है। भारतीय कंपनियां पूर्व में ही दुनिया को कई तरह की वैक्सीन की बड़ी मात्रा में पूर्ति कर रही हैं। साथ ही भारत महिलाओं और बच्चों को प्रतिरक्षा प्रदान करने का दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम चला रहा है। देश के यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) कार्यक्रम का लक्ष्य हर साल 2.6 करोड़ नवजात और 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण का है। जिन्हें 39 करोड़ वैक्सीन हर साल लगाई जाती है।

भारत को बढ़ानी होगी क्षमता
40 से 50 करोड़ वैक्सीन के लिए भारत को अपनी क्षमताओं में तेजी से इजाफा करना होगा। वैक्सीन कोल्ड चेन नेटवर्क,सीरिंज और कांच की शीशियों के स्टॉक में बढ़ोतरी और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देना होगा। अन्यथा वैक्सीन लोगों की पहुंच में नहीं होगी जिसकी ज्यादा जरूरत है।

अच्छी गुणवत्ता वाले कांच की आवश्यकता
कांच की वैश्विक कमी के कारण यह समस्या शुरू हुई है। खराब गुणवत्ता वाले कांच से वैक्सीन की शीशी नहीं बनायी जा सकी है। इसे बोरोसिलिकेट ग्लास से बनाया जाता है। यह रासायनिक रूप से स्थिर होता है और लंबे समय तक ठंड और यातायात के दौरान भी सुरक्षित रहता है। हालांकि एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसे ग्लास का विश्व में कुल उत्पादन का सिर्फ 10 फीसद होता है। इसका उपाय ग्लास का पुन: प्रयोग है। यह काफी सस्ता होता है। एक रिपोर्ट के अनुसारहर साल 50 अरब शीशे के कंटेनर मेडिकल कार्य के लिए इस्तेमाल होते हैं। इनमें से 15 से 20 अरब मेडिकल शीशियों के लिए होते हैं। सिर्फ आधी दुनिया को वैक्सीन लगाने के लिए अतिरिक्त 3.5 अरब शीशियों की आवश्यकता होगी। इस कारण से कम से कम करीब 25 फीसद कांच की जरूरत में बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में दुनिया में पर्याप्त वैक्सीन की शीशियां नहीं हैं।