September 26, 2020

समर्थकों को सक्रिय करेंगे पायलट

कार्यकर्ताओं में पकड़ मजबूत

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 1 सितम्बर। सचिन पायलट प्रदेशभर के अपने समर्थकों को एकजुट करने में जुटे हैं। पायलट अपने समर्थकों से टेलिफोन पर संपर्क कर रहे हैं। पायलट के खास विधायक लगातार कार्यकर्ताओं से संपर्क साध रहे हैं। पायलट प्रदेश की यात्रा करेंगे। वे प्रदेश के सभी 33 जिलों में दौरे करेंगे। इसकी शुरूआत पूर्वी राजस्थान से होगी। पूर्वी राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में पायलट की पकड़ मजबूत है। इन जिलों में गुर्जर और मीणा मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इनमें टोंक,दौसा,करौली,सवाईमाधोपुर,भरतपुर व अलवर जिले शामिल है। टोंक शहर की विधानसभा सीट से तो पायलट विधायक हैं। वे पिछले दिनों जयपुर से टोंक तक सड़क मार्ग से गए तो अपना शक्ति प्रदर्शन किया। अब इसी तरह का शक्ति प्रदर्शन पूर्वी राजस्थान के जिलों में करने की तैयारी की जा रही है। सितंबर माह में होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन को लेकर पायलट के विश्वस्त विधायक रमेश मीणा, विश्वेंद्र सिंह,जी.आर.खटाणा और मुरारी लाल मीणा शक्ति प्रदर्शन का रोड़ मैप तैयार कर रहे हैं। इसके बाद अक्टूबर माह में पायलट गहलोत के गृह संभाग जोधपुर जाएंगे। जोधपुर संभाग के बाड़मेर और जैसलमेर दौरे की कमान वरिष्ठ विधायक हेमाराम चौधरी संभालेंगे। जाट बहुल नागौर जिले की कमान विधायक मुकेश भाकर संभालेंगे। इसके बाद वे सीकर जाएंगे। सीकर में पायलट के दौरे का जिम्मा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत के पास रहेगा। अजमेर से पायलट खुद सांसद रहें है। ऐसे में उनके समर्थकों की वहां बड़ी टीम है। अजमेर का दौरा वे सबसे अंत में करना चाहते हैं। पायलट के विश्वस्तों का कहना है कि जिलों में जाकर वे अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं।

शीत युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ
पायलट न फिलहाल सरकार में है और न ही संगठन में हैं। अभी वे कांग्रेस के नेता और विधायक जरुर हैं। ऐसे में पायलट के इन दौरों के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। क्या पायलट बगावत और घर वापसी के बाद जनता के बीच अपने समर्थन का पारा नापने के लिए दौरे करेंगे या दौरों से जनसमस्याएं सुनकर गहलोत और अपनी ही पार्टी की सरकार पर जनता के काम का दबाब बनाएंगे। फिलहाल पायलट ने इस पर अपनी रणनीति साफ नहीं की है। पायलट की इस मंशा से साफ है कि उनकी घर वापसी से संघर्ष विराम जरुर हुआ लेकिन शीत युद्ध खत्म नहीं हुआ है। कांग्रेस आलाकमान ने दोनों के बीच संतुलन और समन्वय की ठोस कोशिश नहीं की तो भविष्य में भी किसी संकट से इंकार नहीं किया जा सकता।