November 25, 2020

सरकार के कदमों का दिखा असर

रेटिंग एजेंसी फिच व एसबीआई ने माना

नई दिल्ली, (एजेंसी)। कोरोना से बिगड़ी अर्थव्यवस्था की चाल को सुधारने के लिए सरकार के स्तर पर जो लगातार प्रयास हो रहे हैं, उसने हालात को थामने में काफी अहम भूमिका निभाई है। चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक विकास दर के अभी भी काफी नीचे रहने के अनुमान हैं, लेकिन एक के बाद एक आर्थिक एजेंसियां मानने लगी हैं कि पहले के अनुमान के मुकाबले स्थिति ज्यादा बेहतर है। उदाहरण के तौर पर एसबीआइ की रिपोर्ट इकोरैप ने वर्ष 2020-21 के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर में गिरावट के अनुमान को 12.5 फीसद से घटा कर 10.7 फीसद कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने भी अनुमान में सुधार करते हुए अब इकोनॉमी में 10.5 फीसद की गिरावट की बात कहती है। फिच ने यह भी कहा है कि कोरोना महामारी के संदर्भ में भारत ने जो कदम उठाये हैं उससे यहां मध्यावधि में आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार के ठीक ठाक रहने की उम्मीद है। अगर विकास दर को और तेज करना है तो भारत सरकार को निवेश व उत्पादकता को बेहतर करने के लिए और भी सुधारवादी कदम उठाने होंगे। फिच के मुताबिक आने वाली तिमाहियों में कोरोना की वजह से कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन प्रभावित होंगे, बैंकिंग व गैर बैंकिंग कंपनियों की वित्तीय स्थिति खराब होगी। फिच ने हाल के महीनों में श्रम सुधारों के संदर्भ में उठाये गये कदमों की काफी तारीफ की है। कृषि सुधारों के तहत बिचौलियों को समाप्त करने के कदम को भी सही ठहराया है। लेकिन यह भी कहा है कि अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक दबाव का खतरा है। एसबीआइ व फिच, दोनो का कहना है कि कोरोना का असर लंबे समय तक रहेगा और भारत सरकार की भावी आर्थिक नीति इस सच्चाई को स्वीकार करते हुए होनी चाहिए। एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष की तरफ से तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की चाल क्या रहेगी यह इस बात से तय होगा कि कोरोना की वैक्सीन कब निकलती है। सितंबर में कोरोना के उच्चतम स्तर पर पहुंचने की बात हो रही थी लेकिन दीवाली बाद का पखवाड़ा काफी महत्वपूर्ण है।