September 28, 2020

सियायी सुलह के लिए कांग्रेस ने बनाया खास फॉर्मूला

राजस्थान में नहीं होगा कोई नाराज, छत्तीसगढ़, यूपी और कर्नाटक की तर्ज पर किया जाएगा नेताओं को एडजस्ट

विशेष संवाददाता
नई दिल्ली/जयपुर, 7 सितम्बर। राजस्थान में सियासी संकट एक बार के लिए 14 अगस्त को खत्म हो गया था, लेकिन स्थाई समाधान निकालने के लिए कांग्रेस आलाकमान काफी गंभीर नजर आ रहा है। कोई भी फैसला जल्दी करने के मूड मेें नहीं है। प्रदेश में सभी विधायकों का असंतोष को पूरी तरह समाप्त करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक और आलाकमान की ओर से एक फॉर्मूला तैयार किया गया है। फॉर्मूले के अनुसार करीब 85 से 90 विधायकों को सत्ता और संगठन में जिम्मेदारी देकर संतुष्ट किया जाएगा। सूत्रों की माने तो कांग्रेस आलामान ने तीन स्दस्यीय कमेटी के माध्यम से बनाए गए फॉर्मूले के तहत अधिकांश विधायकों को सत्ता और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर एडजस्ट किया जाएगा। इसके लिए जरूरत पड़ी तो राजस्थान विधानसभा सदस्य कानून में संशोधन भी किया जा सकता है क्योंकि विधायकों के लिए दोहरे लाभ के पद के लिए स्थान सीमित हैं।

रास्ता निकालने की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि कुछ विधायकों को संसदीय सचिव, कुछ को विभिन्न आयोग, बोर्ड, निगम, यूआईटी में बड़ी जिम्मेदारी देकर राजी किया जाएगा, लेकिन पार्टी के लिए समस्या यह है कि कुछ जगह विधायकों की नियुक्तिकरने से पार्टी को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के उल्लंघन का डर है। लिहाजा इससे बचने के लिए पार्टी ने राजस्थान विधानसभा सदस्य (प्रिवेंशन ऑफ डिस्क्वालिफिकेशन) एक्ट, 2017 में संशोधन की भी योजना बनाई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार जरूरत पडऩे पर एक्ट में संशोधन के लिए सरकार की ओर से संशोधन बिल विधानसभा में पेश किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि तीन सदस्यीय कमेटी भी इस प्लान पर चर्चा कर अपनी सिफारिश सोनिया गांधी को सौंपेगी। कांग्रेस सरकार अशोक गहलोत के नेतृत्व में बिना विघ्न के अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करे इसके लिए हर विकल्प पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए पार्टी के सीनियर नेता अलग-अलग राज्यों में सरकार को मजबूत बनाने के लिए उठाए कदमों का अध्ययन कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने हाल ही में 15 संसदीय सचिव और करीब आधा दर्जन से अधिक विधायकों को बोर्ड, आयोग व निगम में नियुक्ति दी गई है। इसी तरह कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार गिराने के बाद भाजपा को अपनी सरकार में विधायकों को संतुष्ट करने के लिए बोर्ड, आयोग व निगम में नियुक्ति करनी पड़ी वहीं, उत्तर प्रदेश में भी कमोबेश इसी फॉर्मूले पर योगी सरकार काम कर रही है। हालांकि चुनाव आयोग ने दिल्ली में 20 विधायकों के संसदीय सचिव बनने से उनकी सदस्यता सदस्यता निरस्त कर दी और यह मामला राष्ट्रपति तक पहुंचने के बाद सुलझा।

10 से ज्यादा विधायक एडजस्ट होंगे
राज्य मंत्रिमंडल में अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री सहित 22 मंत्री हैं। इनमें भंवरलाल मेघवाल की तबीयत खराब है और शिक्षा मंत्री गोविन्द डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा चुका है इसलिए इन दोनों की जगह किसी अन्य विधायक को मंत्री बनाया जा सकता है। इस तरह 10 विधायकों को मंत्रिमंडल में सीधे तौर पर जगह मिल जाएगी। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के आधार पर कुछ मंत्रियों को हटाकर उनकी जगह दूसरे विधायकों को मौका दिया जा सकता है। वहीं, विधानसभा में उपाध्यक्ष के खाली पद को भरा जाएगा।