Tue. Jul 16th, 2019

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल को 25 तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मामला

नई दिल्ली, 11 जुलाई (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में मध्यस्थता की प्रक्रिया को खत्म करने की मांग वाली याचिका को ठुकरा दिया है। अयोध्या मामले में हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद ने याचिका दाखिल कर कहा था कि मध्यस्थता के लेकर किए गए प्रयासों से कोई खास प्रगति नहीं हुई है, लिहाजा यह प्रक्रिया रोककर कोर्ट मामले की जल्द सुनवाई करे। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक बेंच ने मध्यस्थता पैनल को अंतरिम रिपोर्ट पेश करने को कहा।

मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया खत्म नहीं होगी और वह पैनल के अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। पैनल 18 जुलाई को अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जरूरी हुआ तो 25 जुलाई से अयोध्या मामले में दैनिक आधार पर सुनवाई होगी। कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल को 25 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मध्यस्थता पैनल को भंग करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमने मध्यस्थता पैनल गठित किया है। हमें रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। मध्यस्थों को इस पर रिपोर्ट पेश करने दीजिए।

25 जुलाई से शुरू हो सकती है दैनिक आधार पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की रोजाना सुनवाई शुरू करने संबंधी औपचारिक आदेश 18 जुलाई को जस्टिस कलीफुल्ला पैनल की अंतरिम रिपोर्ट को देखने के बाद किया जाएगा। इसका मतलब है कि अगर कोर्ट को लगा कि मध्यस्थता प्रक्रिया से कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है, तभी 25 जुलाई से मामले की दैनिक आधार पर सुनवाई होगी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 8 मार्च को पूर्व न्यायाधीश एफएम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी, जिसे मामले का सर्वमान्य समाधान निकालना था। अब समिति को 15 अगस्त तक का समय दिया गया है। इस बीच, कोर्ट से कहा गया है कि तीन सदस्यीय समिति को न्यायालय द्वारा सौंपे गए भूमि विवाद मामले में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा है। ऐसे में इस पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट का मध्यस्थता के प्रयासों पर जोर है। समय बढ़ाने को लेकर पीठ ने कहा था कि यदि मध्यस्थता करने वाले परिणाम को लेकर आशान्वित हैं और 15 अगस्त तक का समय चाहते हैं तो समय देने में क्या नुकसान है? यह मुद्दा सालों से लंबित है। इसके लिए समय क्यों नहीं देना चाहिए? मध्यस्थता के लिए गठित समिति में जस्टिस कलीफुल्ला के अलावा अध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू को सदस्य बनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा बागी विधायकों को दी जाए सुरक्षा, आज शाम 6 बजे तक स्पीकर को सौंपे इस्तीफा

नई दिल्ली, 11 जुलाई (एजेंसी)। कर्नाटक में दिन पर दिन सियासी ड्रामा बढ़ता जा रहा है। गठबंधन सरकार के बागी विधायकों द्वारा इस्तीफा देने के बाद से ही उन्हें मनाने का दौर जारी है। इस बीच गवर्नर को इस्तीफा दे चुके 10 विधायकों द्वारा इस्तीफा मंजूर किए जाने में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। इस याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कांग्रेस-जेडीएस के 10 बागी विधायक इस्तीफा देना चाहते हैं तो आज शाम 6 बजे स्पीकर को इस्तीफा सौंपे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि बागी विधायकों के इस्तीफे पर कर्नाटक स्पीकर बाकी बचे वक्त में निर्णय लें। कोर्ट ने कर्नाटक पुलिस पुलिस मानिदेशक को सभी विधायकों को सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए। अब इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की जाएगी। सीनियर एडव्होकेट मुकुल रोहतगी द्वारा बुधवार को सीजेआई रंजन गोगोई के सामने जल्द सुनवाई के लिए संयुक्त याचिका दायर की गई थी। हालांकि सीजेआई गोगोई द्वारा इस याचिका पर गुरुवार को संबंधित बैंच में सुनवाई के लिए लिस्ट करने का कहा था। ऐसे में अब ये याचिका जस्टिस एस ए बोबडे की बेंच द्वारा सुनी जाएगी।
बता दें कि याचिका लगाने वाले विधायक प्रताप गौडा पाटिल, रमेश जरखीहोली, बैराती बसवराज, बीसी पाटिल, एस टी सोमशेखर, अरबैल शिवराम हैबर, महेश कुमाथाल्ली, के गोपालाई, एचडी विश्वनाथ और नारायण गौडा हैं। याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक के स्पीकर के आर रमेश कुमार, मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ याचिका दायर की है। कर्नाटक में 222 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा के 104, कांग्रेस के 78, जेडीएस के 37, बीएसपी का 1, केपीजेपी का 1 और एक निर्दलीय विधायक है।