November 24, 2020

सेना में रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की तैयारी

पेंशन के पैमाने में भी होगा बदलाव

नई दिल्ली, 6 नवम्बर (एजेंसी)। सरकारी प्रस्ताव में देश की तीनों सशस्त्र बलों, थल सेना, नौ सेना और वायु सेना के अधिकारियों की सेवानिवत्ति की उम्र सीमा बढ़ाई जाएगी। साथ ही, अलग-अलग उम्र में सेवानिवृत्ति के आधार पर पेंशन का प्रतिशत भी तय किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के तहत नया विभाग बनाया गया है। मिलिट्री अफेयर्स डिपार्टमेंट, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स ऑफिसरों की रिटायरमेंट एज बढ़ाने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। साथ ही प्री-मैच्योर रिटायरमेंट लेने पर पेंशन काटने का भी प्रस्ताव है।

क्यों हो रहा है विरोध?
आम्र्ड फोर्सेस के अंदर इस प्रस्ताव को लेकर खासी नाराजगी जताई जा रही है। नाराजगी इसलिए क्योंकि इसके लागू होने पर रिटायर होने वाले ऑफिसरों की पेंशन पर भी असर पड़ेगा। इस मामले पर कोर्ट जाने की भी तैयारी की जा रही है। मिलिट्री अफेयर्स डिपार्टमेंट को सीडीएस जनरल बिपिन रावत हेड करते हैं।

किसके निर्देश पर होंगे बदलाव?
मिलिट्री अफेयर्स डिपार्टमेंट से 29 अक्टूबर को एक पत्र जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि 10 नवंबर तक इस संदर्भ में ड्राफ्ट जीएसएल तैयार कर लिया जाए। इसे सीडीएस जनरल बिपिन रावत देखेंगे।

किन अधिकारियों के रिटायरमेंट एज में क्या बदलाव?
नए प्रस्ताव में आर्मी में कर्नल और नेवी तथा एयरफोर्स में इसके समकक्ष अधिकारियों की रिटायरमेंट एज 54 से बढ़ाकर 57 करने, ब्रिगेडियर और इनके समकक्ष अधिकारियों की रिटायरमेंट ऐज 56 से बढ़ाकर 58 साल करने और मेजर जनरल एवं समकक्ष अधिकारियों की रिटायरमेंट एज 58 साल से बढ़ाकर 59 साल करने का प्रस्ताव है। लेफ्टिनेंट जनरल और इससे ऊपर कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही जूनियर कमिशंड ऑफिसर्स और सैनिक और नेवी-एयरफोर्स में इनके समकक्ष जो लॉजिस्टिक्स, टेक्निकल और मेडिकल ब्रांच में हैं, उनकी रिटायरमेंट ऐज 57 साल करने का प्रस्ताव है।

पेंशन में कटौती का क्या होगा फॉर्मूला?
प्रस्ताव में प्री-मैच्योर रिटायरमेंट लेने वाले अधिकारियों की पेंशन को अलग-अलग हिस्से में बांटा गया है। 20 से 25 साल की सर्विस में 50 पर्सेंट पेंशन, 26 से 30 साल की सर्विस में 60 पर्सेंट, 31 से 35 साल की सर्विस में 75 पर्सेंट और 35 साल से ज्यादा की सर्विस में पूरी पेंशन दी जाएगी।

सरकार क्यों ला रही है यह प्रस्ताव?
पत्र में कहा गया है कि सीनियर पोजिशन में कम वेकेंसी होने की वजह से कई अधिकारी बोर्डआउट हो जाते हैं। वहीं कई स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट, जो हाई स्किल जॉब के लिए ट्रेंड होते हैं, वो दूसरे सेक्टर में काम करने के लिए नौकरी छोड़ देते हैं। इससे हाई स्किल्ड मैनपावर का नुकसान होता है और यह आर्म्ड फोर्स के लिए काउंटर प्रॉडक्टिव है।