September 19, 2020

स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर डाल रहा कोरोना

बच्चों के टीकाकरण में भारी गिरावट

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 29 अगस्त। देश में तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच अब बच्चों से लेकर बड़ों तक की स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ता दिखाई दे रहा है। कोरोना महामारी के बाद देश में लगे लॉकडाउन के चलते देश में बड़ी संख्या में बच्चों का टीकाकरण नहीं कराया जा सका है।अगर समय पर इन बच्चों का जरूरी टीकाकरण नहीं कराया गया तो आने वाले समय में इन्हें किसी तरह की गंभीर बीमारी से गुजरना पड़ सकता है। यही नहीं लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में आई कमी का असर गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर भी देखने को मिला। कोरोना के डर से मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों ने अपने आपको घरों में कैद कर लिया जिसके कारण उनका सही इलाज नहीं किया जा सका। अगर ज्यादा दिन ऐसी ही स्थिति बनी रही तो बुजुर्गों और महिलाओं को भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
जनवरी से अप्रैल में टीकाकरण की संख्या में 64 प्रतिशत की कमी आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2020 तक 44 प्रतिशत बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते थे जबकि अप्रैल 2020 में इनकी संख्या बढ़कर 77 प्रतिशत हो गई है। लगभग 10 लाख बच्चों का बीसीजी टीकाकरण नहीं हो सका। बच्चों को लगाया जाने वाला बीसीटी टीका उन्हें टीबी से सुरक्षा प्रदान कर सकता है। जनवरी 2020 के मुकाबले अप्रैल में बीसीजी टीकाकरण 50 प्रतिशत तक कम किया गया। मार्च 2020 के मुकाबले अप्रैल में बीसीजी टीकाकरण में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। लगभग 6 लाख बच्चों ने इस दौरान पोलियो वैक्सीन नहीं ली है। जनवरी 2020 के मुकाबले अप्रैल में ओरल पोलियो 39 प्रतिशत घट गई है। 10 लाख 40 हजार बच्चों को पेंटावैलेंट टीकाकरण जो 5 घातक बीमारियों (मेनिन्जाइटिस, निमोनिया, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस बी और डिप्थीरिया) से बचा सकता है नहीं लगवाया है। जनवरी 2020 के मुकाबले अप्रैल में पेंटावैलेंट टीकाकरण 68 प्रतिशत गिरा है।

महिलाओं की स्वास्थ्य सेवा
अस्पताल में प्रसव मार्च 2020 की तुलना में अप्रैल में 35 प्रतिशत तक गिर गया है। ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि इन बच्चों का जन्म कहां पर हुआ है। पहले के महीनों की तुलना में अप्रैल में सभी अस्पतालों में ओपीडी आधे से ज्यादा कम हो गई। ऑन्कोलॉजीए हृदय रोगों जैसी गंभीर बीमारियों के लिए ओपीडी सेवाओं में भी जनवरी के मुकाबले अप्रैल में 76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। गंभीर बीमारी की ओपीडी जून तक बंद थी जिसके कारण मार्च की तिमाही की तुलना में जून की तिमाही में लगभग 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई ह। मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर की ओपीडीमें 40 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है।