September 27, 2020

हंसते-हंसाते रहिए

हंसी जीवन का प्रभात है, यह शीतकाल की मधुर धूप है तो ग्रीष्म की तपती दुपहरी में सघन छाया। हंसने से आत्मा खिल उठती है। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं दूसरों को भी आनंदित करते हैं। हास-परिहास पीड़ा का दुश्मन है, निराशा और चिंता का अचूक इलाज और दु:खों के लिए रामबाण औषधि है। लखनऊ के रेलवे स्टेशन से आदमी बाहर निकलता है तो बड़े अक्षरों में लिखे बोर्ड पर नजर टिकती है- मुस्कुराइए की आप लखनऊ में हैं। यह वाक्य पढ़ते ही यात्रियों के चेहरे पर मुस्कराहट फैल जाती है। इस एक वाक्य में लखनऊ की जिंदादिली व खुशमिजाजी के दर्शन होते हैं।
सना एक मानवीय लक्षण है, सृष्टि का कोई भी जीवधारी नहीं हंसता लेकिन एक हम मनुष्य ही हंसने वाले प्राणी हैं, जीवन में निरोगी रहने के लिए हमेशा मुस्कराते रहना चाहिए। खाना खाते समय मुस्कराइए, आपको महसूस होगा कि खाना अब अधिक स्वादिष्ट लग रहा है। थैकर एवं शेक्सपियर जैसे विचारकों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रसन्नचित व्यक्ति अधिक जीता है। मनुष्य की आत्मा की संतुष्टि, शारीरिक स्वास्थ्य व बुद्धि की स्थिरता को नापने का एक पैमाना है और वह है चेहरे पर खिली प्रसन्नता।

हंसने के लाभ
प्रसन्नचित व्यक्ति अधिक जीता है। मनुष्य की आत्मा की संतुष्टि, शारीरिक स्वस्थता व बुद्धि की स्थिरता को नापने का एक पैमाना है और वह है चेहरे पर खिली प्रसन्नता। शरीर में पेट और छाती के बीच में एक डायफ्रॉम होता है, जो हंसते समय धुकधुकी का कार्य करता है। फलस्वरूप पेट, फेफड़े और यकृत की मालिश हो जाती है। हंसने से ऑक्सीजन का संचार अधिक होता है व दूषित वायु बाहर निकलती है। नियमित रूप से खुलकर हंसना शरीर के सभी अवयवों को ताकतवर और पुष्ट करता है व शरीर में रक्त संचार की गति बढ़ जाती है तथा पाचन तंत्र अधिक कुशलता से कार्य करता है। जोर से कहकहे लगाने से पूरे शरीर में प्रत्येक अंग को गति मिलती है, फलस्वरूप शरीर में मौजूद एंडोफ्राइन ग्रंथि (हारमोन दाता प्रणाली) सुचारु रूप से चलने लगती है, जो कि कई रोगों से छुटकारा दिलाने में सहायक है। मनोवैज्ञानिक प्रयोगों से स्पष्ट हुआ है कि अधिक हंसने वाले बच्चे अधिक बुद्धिमान होते हैं। हंसना सभी के शारीरिक व मानसिक विकास में अत्यंत सहायक है। जापान के लोग अपने बच्चों को प्रारंभ से ही हंसते रहने की शिक्षा देते हैं। दुनिया में सुख एवं दु:ख दोनों ही धूप-छांव की भांति आते-जाते हैं। यदि मनुष्य दोनों परिस्थितियों में हंसमुख रहे तो उसका मन सदैव काबू में रहता है व वह चिंता से बचा रह सकता है। आज के इस तनावपूर्ण वातावरण में व्यक्ति अपनी मुस्कराहट व हंसी को भूलता जा रहा है,फलस्वरूप तनाव जन्य बीमारियां जैसे- उच्च रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, हिस्टीरिया, पागलपन, डिप्रेशन आदि बहुत-सी बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है। हंसने से मनुष्य को कई लाभ होते है:-

  • हंसते समय क्रोध नहीं आता।
  • हंसने से आत्मसंतोष के साथ सुखद अनुभूति होती है।
  • शरीर में नई स्फूर्ति का संचार होता है।
  • हंसने से मन में उत्साह का संचार होता है।
  • ब्लड प्रेशर कम होता है।
  • हंसी मांसपेशियों में खिंचाव कम करती है।
  • हंसी दर्द दूर करती है
  • इससे शरीर के साथ-साथ दिमाग की भी एक्सरसाइज होती है।