September 27, 2020

हाइपरटेंशन कोरोना से भी घातक

  • डेेथ ऑडिट रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 12 सितम्बर। जीवनशैली में आ रहे बदलाव के कारण लोगो को स्वास्थ्य सम्बधी परेशानियां हो रही ह। खासकर हाइपरटेंशन मरीजों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही ह। हाइपरटेंशन, कोरोनाकाल में ऐसे मरीजों को टेंशन दे रही है। बीते दिनों कोटा मेडिकल कॉलेज की डेथ ऑडिट कमेटी ने कोरोना से हुई मौतों की डेथ ऑडिट की तो इसका खुलासा हुआ। कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया है कि कोरोना का सबसे अधिक असर हाइपरटेंशन मरीजों पर हुआ। 43.4 प्रतिशत हाइपरटेंशन मरीजों की सबसे अधिक मौतें हुई है। यानी 33 मरीज हाइपरटेंशन का शिकार थे। वही 27.6 प्रतिशत (21 मौत) के मरीजो के डायबिटिज थी। मेडिकल कॉलेज की डेथ ऑडिट कमेटी ने 76 मरीजो की मौत के कारणों को जाना तो डेथ ऑडिट में सामने आया कि इन मौत में हाइपरटेंशन के 43.4 प्रतिशत, डायबिटिज के 27.6 प्रतिशत, हार्ट डिजिज के 19.7 प्रतिशत, रेसपेक्टरी फेलियर के 11.8 प्रतिशत व किडनी डिजिज के 9.2 प्रतिशत मरीज थ। डेथ ऑडिट कमेटी के संयोजक डॉ. मनोज सालूजा ने बताया कि अमूमन 95 प्रतिशत लोगों में हाइपरटेंशन बीमारी होने का कारण पता नहीं चलता है। यह जीवनशैली में बदलाव के कारण होता है। मानसिक तनाव भी इसका प्रमुख कारण है। व्यायाम की कमी, खाने में नमक अधिक व तली चीजें से यह हाइपरटेंशन होता है।

मानसिक तनाव सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों की माने तो मानसिक तनाव से भी हाई ब्लड प्रेशर बनता है. सकारात्मक धैर्य रखने से इस पर नियंत्रण रखा जा सकता है, लेकिन बहुत कम लोग इस पर नियंत्रण रखते हैं। जिन मरीजों में बीपी ज्यादा होती है. ऐसे लोगों में रक्त गाड़ा होता है। स्वत: धक्का जमने की प्रवृति अधिक होती है। कोविड सक्रमित मरीजों में ह्दय, फेफड़ों व अन्य अंगों में धक्का जमने लग जाता है, जो मृत्यु का कारण होता है। वहीं, बीपी अधिक होने से ह्दय की पम्प क्षमता कमजोर होती है. ह्दयघात की संभावना बढ़ जाती है।