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107 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

चिदंबरम को बड़ी राहत

नई दिल्ली, 4 दिसम्बर (एजेंसी)। आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में बीते 107 दिनों से हिरासत में चल रहे पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2 लाख रुपये के मुचलके और बिना इजाजत विदेश न जाने की शर्त पर जमानत दे दी है। अब वह जल्द ही तिहाड़ जेल से बाहर आ सकेंगे। अदालत ने कहा कि चिदंबरम जमानत पर छूटने के बाद गवाहों से संपर्क करने की कोशिश नही करेंगे और कोर्ट की इजाजत के बगैर विदेश नही जाएंगे। साथ ही केस के बारे में प्रेस ब्रीफिंग नही करेंगे। चिदंबरम ने दिल्ली हाई कोर्ट के 15 नवंबर के आदेश को चुनौती दी थी। तब हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में आया तो 28 नवंबर को जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस ऋषिकेश राय की पीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला सुनाने के लिए बुधवार का दिन तय किया था। पिछली सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट के समक्ष दावा किया था कि चिदंबरम हिरासत में होने के बावजूद महत्वपूर्ण गवाहों को प्रभावित कर रहे हैं। इस पर चिदंंबरम के वकील का कहना था कि जांच एजेंसी का यह आरोप निराधार है और वह ऐसे आरोप लगाकर पूर्व वित्त मंत्री की प्रतिष्ठा बर्बाद करने का प्रयास कर रही है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया था। तुषार मेहता ने कहा था कि मनी लांड्रिंग एक गंभीर अपराध है। इससे न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है, बल्कि पूरी व्यवस्था के प्रति आम जनता के विश्वास को भी डगमगाता है। चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश की थी। उन्होंने मेहता की बात का विरोध करते हुए कहा था कि ऐसा एक भी सबूत साक्ष्य नहीं है जिससे पूर्व केंद्रीय मंत्री को इस केस से जोड़ जाए।बता दें, चिदंबरम को पहली बार आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को उस मामले में बेल दे दी थी, लेकिन इससे पहले ही 16 अक्टूबर को श्वष्ठ ने मनी लांड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।