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30 दिन बाद चुनाव

राजनीतिक गणित को लेकर शुरू हुई अटकलें

नई दिल्ली, 11 मार्च (एजेंसी)। लोकसभा चुनाव का इंतजार खत्म हो चुका है। चुनाव आयोग ने ऐलान किया है कि इस बार लोकसभा चुनाव 7 चरणों में होंग। लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होगा, वहीं 23 मई को चुनावों के नतीजे आएंगे। इस बार किसकी बनेगी सरकार इसे लेकर अभी से ही अटकलों का दौर शुरू हो गया है। कुछ चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार फिर से भाजपा की सरकार बनेगी लेकिन पार्टी के लिए ये चुनौती आसान नहीं होगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को धमाकेदार जीत मिली थी। इस जीत के बाद भाजपा को विधानसभा चुनावों में भी लगातार कामयाबी मिलने लगी। एक के बाद राज्यों में भाजपा की सरकार बनने लगी। 2017 में तो भाजपा की 19 राज्यों में सरकार थी लेकिन पिछले दो साल में तस्वीर थोड़ी बदली है। भाजपा को कुछ राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। इस वक्त 15 राज्यों में भाजपा की सरकार है। कुछ राज्यों में गठबंधन की सरकार तो कही पर खुद की अकेली सरकार। 2014 में सिर्फ 7 राज्यों में भाजपा की सरकार थी। इस वक्त 15 राज्यों में भाजपा की सरकार है, लेकिन सिर्फ 5 राज्यों में उसने अकेले दम पर सरकार बनाई है। बाकी के 10 राज्यों में भाजपा ने गठबंधन की सरकार बनाई है। दूसरी तरफ कांग्रेस की इस वक्त सिर्फ चार राज्यों में अकेले दम पर सरकार है। साल 2014 के चुनाव से पहले कांग्रेस की 14 राज्यों में या तो अकले दम पर या फिर गठबंधन की सरकार थी. फिलहाल ये संख्या घटकर 6 पर आ गई है. पिछले साल मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत के बाद कांग्रेस को नई ताकत मिल गई है। अभी जिन 6 राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वहां से उनके 107 एमपी आते हैं जिसमें पंजाब से 13, राजस्थान से 25, मध्यप्रदेश से 29, छत्तीसगढ से 11, कर्नाटक से 28 और पुद्दुचेरी से 1 सदस्य शामिल है. जबकि जहां एनडीए की सरकार है वहां से 252 लोकसभा के सांसद हैं।

इन चुनावों में रहेंगे छह बड़े चेहरे

इस बार चुनाव में छह बड़े चेहरे सबसे ज्यादा नजर आने वाले हैं। भाजपा ने 2013 में मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था, तब से लोकसभा चुनाव समेत 32 चुनाव हो चुके हैं। हर चुनाव में मोदी ही भाजपा के लिए प्रचार का प्रमुख चेहरा रहे हैं। इसके अलावा पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे अमित शाह ने राज्य में एनडीए को 80 में से 73 सीटें दिलवाई थीं। जुलाई 2014 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। शाह के अध्यक्ष बनने के बाद अब तक 27 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए।

राहुल-प्रियंका : दिसंबर 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी को 2018 के आखिर में कामयाबी मिली जब मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया। 20 साल में यह पहला मौका है, जब लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी कांग्रेस का नेतृत्व नहीं करेंगी। राहुल के नेतृत्व में पार्टी का यह पहला लोकसभा चुनाव होगा। उधर राहुल गांधी ने प्रियंका को इसी साल 23 जनवरी को कांग्रेस महासचिव बनाया और पूर्वी उत्तर प्रदेश की 41 लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी। नेहरू-गांधी परिवार से कांग्रेस में यह 11वीं एंट्री है। इससे पहले प्रियंका सिर्फ अमेठी-रायबरेली में ही प्रचार करती थीं।

मायावती-अखिलेश : 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा सिर्फ 5 सीटों पर जीत पाई थी। वहीं, बसपा का खाता भी नहीं खुला था। लेकिन दोनों पार्टियों का उत्तर प्रदेश में वोट शेयर 20 प्रतिशत के आसपास था। 25 साल बाद दोनों दल भाजपा को रोकने के लिए साथ आए हैं। 2014 में भाजपा का उत्तर प्रदेश में वोट शेयर 43 प्रतिशत था। ऐसे में मायावती-अखिलेश का साथ आना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

ममता बनर्जी: मोदी विरोधी महागठबंधन को आकार देने की कोशिशों में ममता बनर्जी सबसे प्रमुख चेहरा हैं। 2014 में मोदी लहर के बावजूद बंगाल में ममता की तृणमूल कांग्रेस ने 42 में से 34 सीटें जीती थीं। ममता ने हाल ही में कोलकाता में विपक्ष की बड़ी रैली की थी। इसमें 15 से ज्यादा दलों के नेता शामिल हुए थे। हालांकि, ममता बंगाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर चुकी हैं।