October 25, 2020

35 फीसदी सरपंच प्रत्याशी अशिक्षित

विकास की गंगा बहाने का कर रहे दावा

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 25 सितम्बर। राजस्थान में गांव की सरकार चुनने का समय आ गया है। पहले चरण के लिए 28 सितंबर को मतदान होना हैं। जीत का सेहरा अपने माथे पर बांधने के लिए प्रत्याशी गांवों में हर चौखट तक पहुंचकर गांव की तस्वीर बदलने की बात कह रहे हैं लेकिन इनमें से कुछ प्रत्याशी ऐसे भी हैं जो पढऩा लिखना तो दूर हस्ताक्षर करना भी नहीं जानते हैं। पहले चरण की तस्वीर साफ होने के बाद नामाकंन पत्रों को खंगालने पर प्रत्याशियों की रोचक जानकारी सामने आई जिसमें सामने आया की कम पढ़े-लिखे भी गांव का मुखिया बनना चाहते हैं।

कागज और कलम से दूर
गांव की सरकार यानि ग्राम पंचायतों के चुनाव में जयपुर जिले में प्रथम चरण में तीन पंचायत समितियों की 70 ग्राम पंचायतों में 464 प्रत्याशी चुनावी महासंग्राम में ताल ठोकने उतरे हैं। इनमें से 16 प्रत्याशियों का कागज और कलम से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं रहा हैं। यानि की पढ़ाई से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा 162 प्रत्याशी केवल हस्ताक्षर करना ही जानते हैं यानि की साक्षर हैं।

68 प्रत्याशी कक्षा आठ पास
कक्षा आठ पास किए 68 प्रत्याशी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। ये प्रत्याशी सरपंच बन गांव में विकास की गंगा बहाने के दावे कर वोट मांग रहे है वहीं जिला निर्वाचन के आंकड़ों के सबसे ज्यादा 35 फीसदी प्रत्याशी ऐसे हैं जो केवल हस्ताक्षर करना ही जानते हैं। वहीं 24 प्रतिशत ऐसे प्रत्याशी हैं जिन्होने ग्रेजुऐशन,पोस्ट ग्रेजुऐशन,बीएड, एमए की डिग्री हासिल कर रखी हैं। 8 वीं से 12 वीं पास प्रत्याशियों का आंकड़ा 37 फीसदी हैं। दरअसल चुनाव के दौरान जनता की ओर से सही दावेदार का चयन किया जाए। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि जनता को अपने नेताओं के बारे में पूरी जानकारी हो। इसमें प्रत्याशियों की शैक्षणिक योग्यता भी बहुत मायने रखती है।