November 24, 2020

4 किलो दूध देने वाली बीटल नस्ल की बकरी का पालन कैसे करें

बीटल नस्ल की बकरी पालन पंजाब और हरियाणा राज्य में पाई जाती है। इसका पालन पंजाब के अमृतसर, फिरोजपुर और गुरदासपुर जिले में बड़ी संख्या में होता है। इसका पालन डेयरी उद्योग की पूर्ति करने के लिए अलावा मांस के लिए होता है। इस किस्म की बकरियों के कान लटके हुए, टांगे लंबी, पूंछ छोटी और पतली और सींग पीछे की तरफ मुड़े हुए होते हैं। इसके नर बकरे का वजन 50 से 60 किलो और मादा बकरी का वजन 35 से 40 किलो होता है। वहीं नर बकरे की लंबाई 86 सेंटीमीटर और मादा बकरी की लंबाई 71 सेंटीमीटर के आसपास होती है। बीटल किस्म की बकरी रोजाना 2 से 4 किलो दूध देने में सक्षम है। यह एक ब्यांत में 150 से 190 किलो दूध देती है। बीटल किस्म की बकरी स्वभाव से जिज्ञासु होती है। यह स्वाद में ख_ा, मीठा, नमकीन और कड़वे किस्म का चारा खाती है। यह लोबिया, बरसीम और लहसुन बड़े चाव से खाती है। बीटल मटर, ग्वार, मक्का, जौ जैसे अनाज खाती है। यह पीपल, आम, नीम, अशोका और बरगद की पत्तियां खाती है। झाड़ी वाले पौधों में इसे गोखरू, खेजरी, करौंदा और बेरी पंसद है। जड़ वाले पौधों में इसे आलू, मूली, चुकंदर, गाजर, शलगम, फूल गोभी और बंद गोभी भाती है। वहीं घास में यह नेपियर, स्टाइलो, गिन्नी और दूब का सेवन करती है। इसे चने, मंगूफली, जौ, अरहर का संरक्षित चारा बेहद पसंद है। सुखे अनाज जैसे गेहूं, मक्का, ज्वार, जौ और बाजरा इसे पसंद है। समुद्री दूध के पौधे खाना के अलावा फिश मिल और ब्लड मील खाना पसंद करती है।

मेमने की खुराक कैसे करें
मेमने की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए जन्म के समय खीस अवश्य पिलाना चाहिए। दरअसल, खीस, मैगनीज, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन ए और डी का अच्छा स्त्रोत होता है। जन्म के पहले महीने मेमने को 400 मि।ली। दूध पिलाना चाहिए। जो उम्र के साथ बढ़ता रहता है।

दुधारू बकरियों की खुराक
सामान्यत: दुधारू बकरियां प्रतिदिन 4 से 5 किलो हरे चारे का सेवन कर सकती है। हरे चारे में 1 किलो अरहर, मटर और चने का सुखा भूसा मिला देना चाहिए।

गाभिन बकरियों की देखरेख
गाभिन बकरियों की विषेष देखरेख की जरूरत पड़ती है। गाभिन बकरियों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए ब्याने के 6-7 सप्ताह पहले दूध निकालना बंद कर देना चाहिए। वहीं ब्यांत बकरियों को ब्याने के 15 दिन पहले से ही साफ सुथरे कमरे में रखना चाहिए। बीटल को विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए सीडीटी या सीडी और टी टीका लगवाना चाहिए। मेमने को जन्म टिटनेस का टीका बेहद जरूरी होता है। इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी मेमने को टीका लगाया जाता है।