November 28, 2020

4 साल से ठंडे बस्ते में है एसजेपीयू गठन का प्रस्ताव

अब पीएचक्यू ने दोबारा भिजवाया

सांध्य ज्योति संवाददाता
जयपुर, 2 नवम्बर। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिस विशेष किशोर पुलिस इकाई अर्थात एसजेपीयू के गठन की तैयारी है उसका प्रस्ताव पीएचक्यू चार बार पहले ही राजस्थान सरकार को भेजवा चुका है। विशेष पुलिस इकाई के प्रस्ताव चार साल से ठंडे बस्ते में धूल फांक रहे थे। अब पुलिस मुख्यालय ने चार दिन पहले दोबारा प्रस्ताव भेजवाए हैं। जोधपुर हाईकोर्ट ने 5 फरवरी 2020 को स्व:प्रेरित जनहित याचिका की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 8 सितम्बर 2020 को प्रत्येक जिले में समर्पित रूप से विशेष किशोर पुलिस इकाई के गठन के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद महिला बाल विकास ने गृह विभाग को इसकी क्रियान्वति करने के लिए लिखा है। गृह विभाग से 9 अक्टूबर को डीजीपी से इस सम्बंध में टिप्पणी और प्रस्ताव मांगे। गृह विभाग ने 26 अक्टूबर को जवाबी जानकारी दी तो सामने आया कि पीएचक्यू चार साल पहले ही वर्ष 2016 में विशेष किशोर पुलिस इकाई के गठन के प्रस्ताव भेज चुका है। जानकारी के अनुसारए किशोर न्याय (बालकों के देखरेख संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 107 (1) में प्रत्येक पुलिस थाने में बाल कल्याण अधिकारी नियुक्त करने व अधिनियम धारा 107 (2) में जिले की विशेष किशोर पुलिस इकाई का प्रभारी उप अधीक्षक स्तर के अधिकारी का प्रावधान किया था। इसके बाद गृह विभाग ने ही 23 जून 2016 को पीएचक्यू को पत्र लिखा था। इस संबंध में एडीजी सिविल राइट्स ने 3 अगस्त 2016 को प्रस्ताव भिजवाया था। एसजेपीयू के लिए डीएसपी, हेडकांस्टेबल,सीनियर असिस्टेंट के 42-42 पद तथा कांस्टेबल के 126 पद मांगे गए हैं। इस पदों पर 8 करोड़ 34 लाख 62 हजार 400 वार्षिक खर्च बताया गया है।
यूनिट पर फर्नीचर,बोलेरो, मोटर साइकिल व अन्य संसाधनों पर 4 करोड़ 56 लाख 12 हजार रुपए का खर्च व एसजेपीयू प्रभारी डीएसपी के लिए प्रत्येक जिले में ऑफिस के लिए 21 करोड़ की जरूरत बताई गई है। इसी तरह 13 जुलाई 2018 को एडीजी सिविल राइट्स ने प्रत्येक थाने पर बाल कल्याण अधिकारी की नियुक्ति का प्रस्ताव दिया था। साथ ही बाल कल्याण अधिकारी के लिए सब इंस्पेक्टर के 888 पद और संसाधनों की जरूरत बताई गई है।