Tue. Jul 16th, 2019

बनारसी या कांजीवरम साड़ी असली है या नहीं, कैसे परखें जानिए

बनारसी साड़ी वाराणसी या बनारस शहर में बनने वाली साड़ी हैं, इसलिए इसे बनारसी साड़ी कहते है। बनारसी साड़ी भारत की बेहतरीन साडिय़ों में से एक हैं। और आपको शायद ही कोई महिला मिलेगी जो इस साड़ी को पसंद न करती हो। बनारसी साड़ी को समृद्ध और क्लासिक कैटेगरी में रखा जाता है। इसलिए इसे ब्राइडल आउटफिट में शामिल किया जाता है। बनारसी लहंगा भी अब इसमें शामिल हो गया है। शादीशुदा हर महिला के पास एक जोड़ी बनारसी सिल्क साड़ी जरूर होती है। वहीं, कांजीवरम साडिय़ां दक्षिण भारत से संबंधित हैं लेकिन इन साडिय़ों को भी पूरे भारत में पसंद किया जाता है। आइए जानें बनारसी और कांजीवरम साड़ी के बारे में कुछ बातें।

उत्पत्ति कब और कहां से हुई
मुगल काल के दौरान बनारसी साड़ी अस्तित्व में आई जब मुस्लिम कारीगरों और शिल्पकारों ने बनारस को अपनी संस्कृति के साथ अच्छी तरह मिश्रित करने वाली जगह के रूप में चुना और वहां पर रेशम बनारसी साडिय़ों की बुनाई शुरू की। उनकी विशेषता मुगल-प्रेरित डिजाइन हैं जैसे कि जटिल इंटरफ्लीनिंग फ्लोरल और फोलेट मोटिफ्स, कलगा और बेल, ऊपर की ओर पत्तियों वाला डिजाइन जिसे झालर कहते है।

दोनों साड़ी में क्या फर्क है
बनारसी और कांजीवरम दोनों ही भारत की सबसे बेहतरीन सिल्क साडिय़ों में से हैं, जो विश्व स्तर पर भी लोकप्रिय हैं। जबकि उनमें से बहुत से पहली नजर में समान लग सकते हैं। इन साडिय़ों के बीच मूल अंतर उनकी उत्पत्ति और उनका डिजाइन है, जो आमतौर पर सांस्कृतिक रूप से प्रेरित होता है। जहां कांजीवरम साडिय़ां दक्षिण भारत से संबंधित हैं। कांजीवरम ताल्लुक तमिलनाडु में कांचीपुरम से है। वहीं, बनारसी साड़ी उत्तर प्रदेश के वाराणसी या बनारस से है।

साड़ी असली है या नहीं इसे कैसे परखें

  • असली बनारसी साड़ी पर बने डिजाइन पारंपरिक होते हैं और असली बनारसी साड़ी के पल्लू में हमेशा छह से आठ इंच लंबा प्लेन सिल्क फैब्रिक होता है। अगर आपकी बनारसी साड़ी पर मुगल पैटर्न से प्रेरित अमरू, अंबी और दोमक जैसे पैटर्न हैं तो इसका मतलब है आपके पास असली बनारसी साड़ी है।
  • बनारसी या कांजीवरम साड़ी का फैब्रिक अगर असली होगा तो वो दिखने में चमकदार होगा। कांजीवरम साड़ी को जांचने के लिए उसकी जरी को खुरच कर देखें, अगर उसके नीचे लाल सिल्क निकले तो इसका मतलब है कि आपकी कांजीवरम साड़ी असली है।
  • अलग-अलग रंग के धागों का मेल बनारसी या कांजीवरम सिल्क की साड़ी को एक अलग चमक देता है
  • अपनी सिल्क की साड़ी को एक अंगूठी के बीच से निकालने की कोशिश करें। अगर आप इसमें सफल हो जाती हैं तो इसका मतलब है कि आपके पास असली सिल्क की साड़ी है।