Wed. Feb 19th, 2020

कहीं बच्चे की दवा स्कूल में उसके गिरते परफॉर्मेंस की वजह तो नहीं?

मधुरिमा और माहिरा दोनों के बच्चों के बारे में कई दिनों से स्कूल से शिकायतें आ रही हैं। दोनों बच्चे पुलकित और आदिल पढ़ाई के समय क्लास में ध्यान नहीं लगाते। दोनों के पिछले दो टेस्ट में अंक भी कम हुए हैं। उनके टीचर्स को लगता है कि पैरंट्स-टीचर्स-मीटिंग से पहले ही इस मामले पर घरवालों से बात कर लेनी चाहिए। पुलकित को पिछले कई महीनों से खांसी आती रही है। उसे गले का वायरल और संक्रमण बार-बार होता है, जिसके कारण यह खांसी होने लगती है। डॉक्टर के परामर्श के बाद उसकी मम्मी मेडिकल स्टोर से एक कफ सीरप लेकर उसे पिलाती रहीं। इससे खांसी दब जाती है और वह आराम से सो जाता है। आदिल को लगभग छह महीने पहले दौरे (सीजर) पडऩे की शिकायत हुई, जिससे उसका पूरा शरीर बेतरतीब ढंग से हिलने-डुलने लगा। साथ ही वह कुछ देर के लिए बेहोश भी हो गया। एक डॉक्टर के परामर्श से उसकी इस समस्या के लिए दवा शुरू हो गई है, जिससे अब दौरों की समस्या शांत है।

दवाइयों के वजह से बच्चों को आती है नींद और सुस्ती: पुलकित का बार-बार कफ सीरप पीना, जिसमें ऐंटीहिस्टामिनिक दवा मौजूद है और आदिल का ऐंटिसीजर दवा का लगातार सेवन। इन दोनों ही दवाओं से इन बच्चों में नींद अत्यधिक आने की समस्या हो रही है। ये दोनों क्लास में सुस्त और आलसयुक्त रहते हैं, जिसके कारण स्कूली पढ़ाई-लिखाई के दौरान इनका ध्यान नहीं लग पाता। नतीजा गिरता परफॉर्मेंस और घटते नंबर। फिर इसी वजह से घरवालों की डांट और स्कूल में भी टीचर्स की बातें सुननी पड़ती है। ऐसे में आखिर क्या किया जाए?

दवा हो सकती है खराब परफॉर्मेंस की वजह: इस लेख का उद्देश्य किसी उपचार पर आरोप-प्रत्यारोप लगाना नहीं है। बल्कि लोगों को जागरूक करना है कि अगर कोई बच्चा स्कूल में पढ़ाई और खेल पर ठीक से ध्यान न दे पा रहा हो, सुस्त रहता हो अथवा उसके अंक कम आ रहे हों तो यह भी सोचना जरूरी है कि उसे कोई बीमारी तो नहीं। या फिर वह किसी दवा का सेवन तो नहीं कर रहा? अनेक बीमारियों और दवाओं के कारण भी स्कूलों में पढ़ते बच्चों का परफॉर्मेंस गिर सकता है, जिसमें उनका कोई दोष नहीं होता।

कई दवाएं निद्राकारक होती हैं: कफ सीरप में ऐंटीहिस्टामिनिक दवाओं से कई बार सुस्ती और अधिक नींद आने लगती है। दौरों का उपचार जिन दवाओं से किया जाता है, उनमें से कई दवाएं निद्राकारक होती हैं यानी इनसे नींद आती है। कई बार अपने बच्चों की भूख बढ़ाने के लिए लोग बच्चों को सायप्रोहेप्टाडीन सीरप पिलाते हैं। इस दवा को लेने से भी बच्चा क्लास में सो सकता है।

स्कूल और घरेलू जीवन में संतुलन बनाया जाए: समाधान क्या है? ध्यान यह रखना है कि बच्चे की बीमारी के साथ उसके स्कूली-घरेलू जीवन में संतुलन बना रहे। बीमारी ठीक करने के साथ यह भी सोचना है कि बच्चे का व्यक्तिगत जीवन दवा के इस्तेमाल से कम-से-कम प्रभावित हो। आखिर इलाज बीमार व्यक्ति का किया जाता है बीमारी का नहीं।