October 27, 2020

शैंपू और बॉथरूम में इस्तेमाल होने वाले क्लीन प्रोडक्ट में होते हैं हानिकारक रसायन

  • सेहत के लिए है घातक

हम अपने शरीर की साफ-सफाई करने के लिए कई तरह के साबुन, शैंपू, कॉस्मेटिक का सामान इस्तेमाल करते हैं। आमतौर पर इन उत्पादों को इस तरह तैयार किया जाता है, जिससे हमारा शरीर साफ हो सके, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि ये उत्पाद स्वयं में भी उतना ही साफ हो। नहाने और टॉयलेट में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पादों में मौजूद रसायन शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है। हालांकि इन उत्पादों में क्लीन प्रोडक्ट का ठप्पा भी लगा रहता है, जिसका मतलब होता है इन उत्पादों में खतरनाक रसायन नहीं होते। इन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायन को इंडोक्राइन डिसरप्टर भी कहते हैं। यानी इन रसायनों से इंडोक्राइन सिस्टम से प्रवाहित होने वाले हार्मोन को नुकसान पहुंचता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि क्लीन प्रोडक्ट से भी शरीर में कई तरह के रसायन घुस जाते हैं जो हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बहुत कम स्तर पर भी अगर इन चीजों का इस्तेमाल किया जाए तो भी इसमें मौजूद रसायन से शरीर को नुकसान पहुंचता है।

रसायनों से शरीर पर तात्कालिक प्रभाव
वैज्ञानिकों ने ताजा रिसर्च में इस बात को जानने की कोशिश की है कि इन रसायनों से शरीर पर तात्कालिक प्रभाव क्या पड़ते हैं। शरीर में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं। इंडोक्राइन डिसरप्टर कैमिकल सामान्यतया बाथ, टॉयलेट और कुछ हाउसहोल्ड प्रोडक्ट में मौजूद रहते हैं। इसके इस्तेमाल से शरीर में हार्मोन रीलिज होने में दिक्कतें पेश आती हैं। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है और थॉयरायड, अस्थमा और यहां तक कि कैंसर जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।
इस बात को साबित करने के लिए वैज्ञानिकों ने विभिन्न तरह के बाथ प्रोडक्ट के एक्सपोजर पर रिसर्च की है। रिसर्च में ऐसे 726 लोगों के यूरिन का सैंपल लिया गया जो 10 तरह के एंडोक्राइन डिसरप्टर का इस्तेमाल करते थे। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ हाइजीन एंड एनवायरोनमेंटल हेल्थ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक शोध में 87 प्रतिशत प्रतिभागियों ने खतरनाक रसायन से बचने के लिए एहतियाती कदम उठाए थे।
जब सभी प्रतिभागियों के साथ तुलना की गई तो पाया गया कि जिन प्रतिभागियों ने खतरनाक रसायनों वाले प्रोडक्ट जैसे कि पैराबीन, ट्राइक्लोसेन और फ्रेगरेसेंज इत्यादिन का इस्तेमाल नहीं किया, उनमें अन्य लोगों की तुलना में बॉडी बर्डन वाले खतरनाक रसायन की मात्रा दोगुने से भी कम थी। बॉडी बर्डन रसायन खतरनाक रसायनों का समूह है।

रिसर्च के आधार पर इन केमिकल से दूर रहना चाहिए
पैराबींस, बीपीए (बिस्फिनॉल ए – यह टॉक्सिन होता है), ट्राइक्लोसेन, बेंजोफेनोन-3