September 23, 2020

कोरोना से बदल रहा हार्ट का शेप

ऐसे में सर्तकता और सावधानी रखने की है खास जरूरत

हार्ट पेशेंट्स के लिए कोरोना वायरस सर्वाधिक खतरनाक साबित हो रहा है। चीन में की गई एक रिसर्च के अनुसार कोरोना से ठीक हो चुके लोग अगर हार्ट पेशेंट हैं, तो उनमें दोबारा संक्रमण की आशंका बनी रहती है। वहीं जर्मनी की यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल फ्रैंकफर्ट ने एक रिसर्च में कहा है कि कोरोना संक्रमित 100 में से 80 मरीजों की एमआरआई जांच से पता चला है कि उनके दिल की शेप में परिवर्तन हुआ है। ऐसे में इस समय हार्ट पेशेंट्स को सतर्क रहने की जरूरत है।

हार्ट पंपिंग होती है कमजोर
कोरोना हार्ट की मांसपेशियों की सूजन बढ़ा देता है, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और वे ब्लॉक हो जाती हैं। जिससे मरीज को हाई अटैक होता है और वह फॉलिस का भी शिकार हो जाता है। कोरोना के कारण हार्ट बीट भी प्रभावित होती है। चीन के बुहान में की गई एक रिसर्च में सामने आया है कि हार्ट पेशेंट्स में कोरोना के कारण डेथ रेट ज्यादा है।

दिल पर पड़ रहा असर
हार्ट पेशेंट किसी भी उम्र का हो उसके हार्ट की पंपिंग कोरोना से कमजोर हो जाती है। जब कोरोना फेफड़ों पर असर करता है तो उसका असर हार्ट पर भी देखने को मिलता है। कुछ मरीजों की इंजियोग्राफी के बाद देखने को मिला कि उनकी हार्ट वेंस नॉर्मल हैं लेकिन उनमें लक्षण हार्ट अटैक के थे। जो उनकी हार्ट मसल्स में सूजन या क्लॉट की वजह से हुआ था।

क्यों है ज्यादा खतरनाक
नॉर्मल मरीज में सर्दी, जुकाम आसानी से ठीक हो जाता है लेकिन हार्ट पेशेंट्स की इससे सांस फूलने लगती है और उनकी मौत होने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार मरीज के परिजन हार्ट अटैक होने के शक में उसे अस्पताल लाते हैं लेकिन बाद में पता चता है कि मरीज को हार्ट अटैक नहीं कोरोना के चलते क्लोटिंग हुई है।

हार्ट पेशेंट रखें ये सावधानियां

  • किसी तरह की टेंशन न लें।
  • समय पर सभी दवाएं लेते रहें।
  • अच्छा। खाना और पूरी नींद लें।
  • अपना ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखें।