Wed. Jan 16th, 2019

सेहत के लिए दही है सही

दूध के मुकाबले दही खाना सेहत के लिए हर तरह से ज्यादा लाभकारी है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई बौडी को एक उम्र के बाद नुकसान देती है। इस के मुकाबले दही में मिलने वाला फासफोरस और विटामिन डी बौडी के लिए लाभकारी होता है।
बीमारियां भगाए दही
दही का नियमित सेवन करने से शरीर कई तरह की बीमारियों से मुक्त रहता है। इस में मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी कैल्सियम को ऐसिड रूप में ढाल देता है। जो लोग बचपन से ही दही का भरपूर मात्रा में सेवन करते हैं उन्हें बुढ़ापे में औस्टियोपोरोसिस जैसा रोग होने का खतरा कम हो जाता है।
दही में अच्छी किस्म के बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं। आंतों में जब अच्छे किस्म के बैक्टीरिया की कमी हो जाती है तो भूख न लगने जैसी तमाम बीमारियां पैदा हो जाती हैं। इस के अलावा बीमारी या ऐंटीबायोटिक थेरैपी के दौरान भोजन में मौजूद विटामिन और खनिज हजम नहीं होते। इस हालत में दही ही सब से अच्छा भोजन बन जाता है। यह इन तत्त्वों को हजम करने में मदद करता है, जिस से पेट में होने वाली बीमारियां अपनेआप खत्म हो जाती हैं। तान्या साहनी के अनुसार आज की भागतीदौड़ती जिंदगी में पेट की बीमारियों से परेशान  होने वाले लोगों की संख्या सब से ज्यादा होती है। ऐसे लोग अपनी डाइट में प्रचुर मात्रा में दही को शामिल करें तो अच्छा रहेगा। इस से पेट में होने वाली सब से खास बीमारी भोजन का न पचना या अपच रहना दूर हो सकता है।
दिल को रखे स्वस्थ
दही का सेवन कर के ब्लड में कोलैस्ट्रौल को कम किया जा सकता है, जिस से हार्ट में होने वाले कोरोनरी आर्टरी रोग से बचाव करना आसान हो जाता है। डाक्टरों का कहना है कि दही खाने से ब्लड कोलैस्ट्रौल को कम किया जा सकता है।
इन्फैक्शन से बचाव
जानकारी के मुताबिक रोज 300 एमएल दही खाने से कैंडिडा इन्फैक्शन द्वारा होने वाले मुंह के छालों से छुटकारा मिलता है। महिलाओं में अकसर कैंडिडा इन्फैक्शन होने के कारण मुंह में छाले पड़ जाते हैं। जिन महिलाओं को इस तरह की शिकायत हो वे दही का भरपूर मात्रा में सेवन करें।
मुंह के छालों पर दिन में 2-3 बार दही लगाने से भी छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं। बौडी के ब्लड सिस्टम में इन्फैक्शन को कंट्रोल करने में व्हाइट ब्लड सैल का योगदान सब से ज्यादा होता है। दही खाने से व्हाइट ब्लड सैल्स मजबूत होती हैं, जो बौडी की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं।
दही है खास
  • दूध में लैक्टोबेसिलस बुलगारिक्स बैक्टीरिया डाला जाता है, जिस से शुगर लैक्टिक ऐसिड में बदल जाती है। इस से दूध जम जाता है। इस जमे दूध को ही दही कहा जाता है। यह प्रिजर्वेटिव की तरह काम करता है। दही खमीर युक्त डेरी उत्पाद माना जाता है।
  • पौष्टिकता के मामले में दही को दूध से कम नहीं माना जाता है। यह कैल्सियम तत्त्व के साथ ही तैयार होता है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट्स को साधारण रूप में तोड़ा जाता है। इसीलिए दही को प्री डाइजैस्टिव फूड माना जाता है। बच्चों के डाक्टर दही को छोटे बच्चों के लिए भी उपयुक्त मानते हैं।
  • दही में सीएलए यानी कंजुगेटेड लिनोलेइक ऐसिड होता है। सीएलए फ्री रैडिकल सैल्स को बनने से रोकने का काम करता है। ये सैल्स बौडी के विकास को रोकने का काम करती हैं। दही से कैंसर और हार्ट रोगों को रोकने में मदद मिलती है।
  • दही को तैयार करते समय इस बात का खास खयाल रखा जाना चाहिए कि इसे फुल फैट मिल्क से तैयार न किया जाए। इस तरह से तैयार दही में फैट और कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। पहले से मीठा और मीठे के रूप में तैयार दही में सीएलए के लाभ कम हो जाते हैं।
  • अगर दही को मीठा खाना है तो इस में चीनी की जगह शहद या ताजा फल मिलाया जा सकता है। दही से बनाई जाने वाली छाछ गरमी को अंदर और बाहर दोनों तरह से बचाती है। गरमी के मौसम में तपती धूप का प्रकोप रोकने के लिए दही और छाछ का सेवन जरूरी होता है।
  • कुछ लोगों में यह भ्रांति होती है कि दही खाने से जुकाम और सर्दी जैसी बीमारियां हो जाती हैं। इस तरह के लोगों को दही का सेवन दिन में खाने के बाद करना चाहिए। ठंडे या फ्रिज में रखे दही का सेवन नहीं करना चाहिए। दही का सेवन हमेशा ताजा ही करना चाहिए।