Tue. Jul 16th, 2019

मिसकैरेज के बाद डिप्रेशन से ऐसे निबटें

प्रैग्नेंसी किसी महिला के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान कई स्वास्थ्य समस्याएं और रिस्क भी होते हैं। प्रैग्नेंसी के दौरान जो सब से बड़े डर की बात होती है, वह है मिसकैरेज। मिसकैरेज होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं।

आनुवंशिक कारण
मिसकैरेज के लगभग 50′ मामले आनुवंशिक कारणों से होते हैं। गर्भ आनुवंशिक रूप से या क्रोमोसोमली विकृत होते हैं, जिस के कारण वे जीवित नहीं रह पाते हैं।

इम्युनोलौजिकल कारण
कुछ महिलाओं के रक्त में एंटीबौडीज होते हैं, जो उन की ही कोशिकाओं पर आक्रमण करते हैं। इनमें से कुछ ऐंटीबौडीज प्लैसेंटा पर आक्रमण करते हैं या ब्लड क्लौट बनने को बढ़ावा देते हैं, जिस से गर्भ का विकास प्रभावित होता है और अंतत: उस की मृत्यु हो जाती है।

हार्मोन असंतुलन
कई हारमोन भी मिसकैरेज में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अगर ये संतुलित मात्रा में हैं, तो ये गर्भाशय में गर्भ के विकसित होने के लिए आदर्श वातावरण उपलब्ध कराते हैं। इसलिए कुछ महिलाएं, जिन में मासिकधर्म से संबंधित समस्याएं होती हैं उन में इस का खतरा अधिक होता है।

ऐनाटौमिक कारण
कुछ महिलाओं के गर्भाशय में सैप्टम या दीवार होती है तो कई महिलाओं के गर्भाशय में बड़ी मात्रा में फाइब्रौयड्स विकसित हो जाते हैं। इन के कारण भी गर्भ को विकसित होने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिलता और प्रैग्नेसी के सफल परिणाम प्राप्त नहीं हो पाते।

संक्रमण
कई बार संक्रमण फैलने से भी मिसकैरेज हो जाता है। यह संक्रमण बैक्टीरिया, वाइरस या किसी पैरासाइट के द्वारा फैल सकता है। हालांकि संक्रमण के कारण होने वाले मिसकैरेज के मामले बहुत दुर्लभ होते हैं।

पर्यावरणीय कारण
हानिकारक पदार्थ जैसे ड्रग्स, अलकोहल, धूम्रपान या अत्यधिक कैफीन का सेवन अथवा अत्यधिक तनाव लेना गर्भ को नुकसान पहुंचा सकते हैं और मिसकैरेज का कारण बन सकते हैं। भारी वजन उठाने से प्लैसेंटा हिल सकता है और मिसकैरेज का कारण बन सकता है।

मिसकैरेज और डिप्रेशन
मिसकैरेज के बाद 80′ महिलाएं डिप्रैशन फील करती हैं। कई महिलाओं में मिसकैरेज केबाद डिप्रैशन इतना गहरा होता है कि उन के मां बनने के बाद भी दूर नहीं हो पाता। ‘ब्रिटिश जनरल औफ साइकिएट्री’ के अनुसार कई महिलाओं में मां बनने और स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के बाद भी 3 साल तक डिप्रैशन के लक्षण देखे जाते हैं। अधिकतर डॉक्टर और महिलाएं सोचती हैं कि एक बार जब वो स्वस्थ बच्चे को जन्म दे देंगी उन का डिप्रैशन, भय और तनाव दूर हो जाएगा, लेकिन यह मामला इतना आसान नहीं होता है। लगभग 13′ महिलाओं में मिसकैरेज के लक्षण 3 वर्ष तक दिखाई देते हैं। 2 बार मिसकैरेज होने पर 19′ महिलाओं में डिप्रैशन के लक्षण 3 वर्ष बाद भी दिखाई देते हैं। कुछ महिलाओं में डिप्रैशन की समस्या नहीं होती है। इस के बायोलौजिकल कारण या परिवार और जीवनसाथी का सहयोग, प्रेम और साथ हो सकता है। उन महिलाओं में मिसकैरेज के बाद डिप्रैशन की समस्या अधिक होती है, जिन में डिप्रैशन का व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहास रहा हो।

  • बचाव
    मिसकैरेज से पूरी तरह बचाव नहीं किया जा सकता, लेकिन ये सावधानियां बरत कर इस की आशंका को कम जरूर किया जा सकता है-\
  • ऐसे भोजन का सेवन करें जिस में साबूत अनाज अधिक मात्रा में शामिल हो।
  • कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें और प्रोटीन व फाइबर का सेवन बढ़ा दें।
  • अपने भोजन में ताजा फल, सब्जियां और सफेद मांस अधिक मात्रा में शामिल करें। लाल मांस और तले भोजन के सेवन से बचें।
  • कौफी का सेवन कम मात्रा में करें। अत्यधिक मात्रा में कैफीन के सेवन से मिसकैरेज होसकता है।
  • तनावमुक्त रहने का प्रयास करें।