Wed. Jul 17th, 2019

कब आती है दोस्ती में दरार

‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे’ श्रुति और राधिका बचपन से साथ रही थीं। दोनों का परिवार भी एकदूसरे को काफी अच्छी तरह जानता था। दोनों ने अपनी पढ़ाई भी एकसाथ पूरी की और अब दोनों नौकरी भी एक ही कंपनी में करती थीं। इन की दोस्ती को देख कर लोग हैरान रह जाते थे। मगर फिर दोनों में न जाने ऐसा क्या हुआ कि उन की दोस्ती भी टूट गई और साथ भी छूट गया।
दरअसल, 20 साल की दोस्ती में उन दोनों ने किसी तीसरे को कभी अपने बीच नहीं आने दिया था। वैसे श्रुति और राधिका की बहुत सी आदतें मेल खाती थी, लेकिन राधिका की एक आदत ऐसी थी जिसे श्रुति बचपन से झेलती आ रही थी।
राधिका हमेशा लेट हो जाती थी। श्रुति हमेशा टाइम पर तैयार हो कर राधिका के घर पर पहुंच जाती थी और दोनों वहीं से औफिस जाती थीं। एक दिन श्रुति औफिस निकलने वाले टाइम पर उस के घर पहुंच गई। लेकिन राधिका फिर से लेट थी।
”राधिका, तू अपनी आदत कब सुधारेगी? हद होती है किसी चीज की। अब हम स्कूलकालेज में नहीं पढ़ते हैं,” राधिका ने चिढ़े स्वर में कहा।
”अरे सौरीज् तू इतना गुस्सा क्यों हो रही है? बस 5 मिनट ही तो लेट हुए हैं। पहुंच जाएंगे,” राधिका औफिस पहुंचने तक श्रुति को मनाने का प्रयास करती रही। लेकिन श्रुति बहुत ज्यादा नाराज हो गई थी।
औफिस पहुंच दोनों अपनेअपने काम में लग गईं। राधिका का ध्यान काम में बिलकुल नहीं था। वह बारबार अपनी दोस्त की तरफ देखे जा रही थी। उधर हंसतेहंसते काम करने वाली श्रुति बहुत सीरियस हो कर काम कर रही थी।
तभी औफिस में उन के साथ काम करने वाली प्रिया राधिका के पास आ कर खड़ी हो गई और फिर बोली, ”हाय राधिका।”
राधिका ने बड़ी मायूसी के साथ प्रिया को हाय बोला।
”क्या हुआ? तुम्हारे और श्रुति के बीच कुछ हुआ है क्या? आज तुम दोनों बहुत अलगअलग और चुपचुप नजर आ रही हो?”
”अरे नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। आज हम दोनों ने सोचा कि बहुत मन लगा कर काम करेंगे। टारगेट पूरा करना है न।”
”ओह, गुड।”
आज पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी ने उन दोनों की दोस्ती पर सवाल किया था।
राधिका को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर श्रुति को हुआ क्या है? राधिका रोज लेट होती थी, लेकिन श्रुति ने कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया था। फिर आज ऐसा क्या हुआ कि श्रुति इतनी ज्यादा नाराज हो गई?
राधिका ने झट अपनी मां को फोन किया, ”हैलो मांज् क्या आप ने श्रुति को कुछ कहा है?”
मां ने चौंकते हुए जवाब दिया, ”श्रुति को? नहीं, मैं ने तो कुछ नहीं कहा। जब वह आई थी तब मैं फोन पर तेरी मौसी से बात कर रही थी। क्यों, क्या हुआ?”
”नहीं, कुछ नहीं हुआ। चलो, मैं बाद में बात करती हूं,” कह राधिका ने फोन काट दिया और मन ही मन सोचने लगी कि आखिर हुआ क्या? इतना तो मुझे पता है कि श्रुति मेरे लेट होने पर इतनी नाराज नहीं हो सकती है। औफिस में लंच ब्रेक के टाइम भी राधिका ने श्रुति से बहुत पूछा कि वह नाराज क्यों है। श्रुति का बस यही जवाब था, ”मैं नाराज नहीं हूं।”
शाम को घर जाते वक्त श्रुति ने अचानक राधिका से एक सवाल किया, ”क्या तू हमारे बीच किसी तीसरे को आने देगी?”
राधिका ने मुसकराते हुए कहा, ”नहीं, कभी नहीं।” फिर श्रुति ने एक और सवाल किया, ”अच्छा तो तू शादी भी नहीं करेगी?”
राधिका ने जोरजोर से हंसते हुए कहा, ”अरे, यह कैसा सवाल है? शादी तो हम दोनों को करनी है।” श्रुति बस ”हां’ कह कर चुप हो गई।
दरअसल, जब श्रुति राधिका के घर गई थी तब राधिका की मां उस की मौसी से उस के रिश्ते की बात कर रही थीं। यह बात श्रुति ने सुन ली थी और यह सुन कर ही ऐसा व्यवहार करने लगी थी।
कितनी अजीब बात है न कि कहां तो श्रुति को राधिका को रिश्ते की बात पर छेडऩा चाहिए था, उस से मजाक करना चाहिए था और कहां श्रुति का व्यवहार ऐसा हो गया जैसे उस की कोई कीमती चीज उस से छिनने वाली है।
कुछ दिन बीत गए, श्रुति फिर से पहली वाली श्रुति जैसा व्यवहार करने लगी। एक दिन राधिका ने श्रुति को बताया कि उस के रिश्ते की बात हो रही है और कल उसे लड़के वाले देखने आ रहे हैं। श्रुति यह सुन कर चौंक गई, ”क्या? तू सच में शादी करना चाहती है?”
राधिका बोली, ”हां, लड़का भी अच्छा है। मैं उसे पहले मिल चुकी हूं। तुझे भी बहुत पसंद आएगाज् और हां तुझे कल जरूर आना है।”
श्रुति ने कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चली गई। अगले दिन श्रुति राधिका के घर तो आई, लेकिन बेमन से। उस दिन राधिका का रिश्ता तय हो गया। सब बहुत खुश थे, लेकिन श्रुति के चेहरे पर मातम छाया था। 6 महीने बाद राधिका की शादी की तारीख भी फिक्स कर दी गई थी।
इन 6 महीनों में श्रुति के व्यवहार में सच में बदलाव आने लगा था। राधिका जब भी श्रुति से पूछती कि ”तू शादी में क्या पहनेगी तो श्रुति बहुत चिढ़ कर जवाब देती कि पहन लूंगी कुछ भी। श्रुति ने राधिका की शादी की खरीदारी में भी ज्यादा मदद नहीं की। जब भी राधिका उसे शौपिंग पर चलने को कहती वह खुद को व्यस्त बताती। अब राधिका भी समझने लगी थी कि श्रुति और उस की दोस्ती में दरार आ रही है।
राधिका ने शुरुआत में सबकुछ ठीक करने की कोशिश भी की, लेकिन अब उस ने भी कोशिश छोड़ दी। वह समझ गई थी कि शायद अब सच में कुछ ठीक नहीं होगा।
लेखिका शासता नैल्सन दोस्ती में होने वाली ऐसी खटास पर कहती हैं, ”मुश्किल वक्त में तो हम दोस्तों के साथ रहने की बहुत बात करते हैं। दरअसल, असलियत यह है कि हमारी जिंदगी के जो खुशी वाले मौके होते हैं उन्हीं पर दोस्तों से सब से ज्यादा तकरार होती है।
शादी का दिन नजदीक आने लगा। गानाबजाना भी शुरू हो गया। श्रुति के कानों में यह गानाबजाना किसी कील की तरह चुभ रहा था। वह अपनी सब से खास दोस्त को, जिस के साथ वह बचपन से रही उसे खुद से दूर जाता देख रही थी।
राधिका भी अब अपना ज्यादातर समय अपने मंगेतर को देती थी। शादी के कुछ दिन पहले राधिका ने श्रुति से कहा, ”मैं चाहती हूं कि मैं जो ड्रैस शादी के फंक्शन में पहनने वाली हूं उस की ज्वैलरी और फुटवियर तेरी पसंद के हों। मेरे पास बिलकुल समय नहीं है। तू देख लेना ये सब और शादी के दिन भी तू मेरे साथ रहना। अगर मुझे किसी चीज की जरूरत हो तो मैं तुझे ही बोलूंगी।”
श्रुति को ये सब नौकरानी के काम की तरह लगने लगा। वह उस दिन बहुत रोई और बाद में उस ने राधिका को साफ मना कर दिया।
यह सुन कर राधिका को बहुत बुरा लगा। उन के बीच की दूरियां और बढऩे लगीं। श्रुति राधिका के मंगेतर से तो बहुत अच्छी तरह बात करती थी, लेकिन राधिका से उतना ही दूर रहने लगी थी। राधिका ये सब देख रही थी जिस से उस के अंदर जलन की भावना उत्पन्न हो गई।
मनोचिकित्सक जोसेलिन चार्नस का कहना है, ”शादीविवाह के माहौल के दौरान अकसर ऐसा होता है कि 2 दोस्तों के बीच अगर कोई दरार है तो वह और बढ़ जाती है। शादीविवाह के मामलों में लोगों को एकदूसरे के प्रति नाराजगी जाहिर करना और भी आसान हो जाता है, इसलिए ऐसे मामले सामने आते हैं जहां लोग अपने अंदर दबी बातों को अपनी नाराजगी से जता पाते हैं।”
शादी वाले दिन श्रुति बहुत अकेला महसूस कर रही थी। उसे बाद में एहसास हुआ कि उस ने इन कीमती लमहों को बेकार कर दिया। वह राधिका से माफी मांगना चाहती थी और बोलना चाहती थी कि वह उस के लिए कितनी महत्त्वपूर्ण है। बिदाई के वक्त श्रुति और राधिका एकदूसरे के सामने आईं, लेकिन कुछ बोल नहीं पाईं। आंखों में आंसू लिए दोनों ने एकदूसरे को गले लगाया और राधिका अपनी नई जिंदगी की तरफ मुड़ गई।
मनोचिकित्सक सेथ मेयर्स का कहना है, ”शादी का मतलब होता है बहुत बड़ा बदलाव और अकसर इंसान बदलाव के साथ खुद को आसानी से नहीं ढाल पाते। इसलिए दोस्त आप को खोने के डर से अपने दिमाग से पहले ही निकालने की कोशिश करने लगते हैं ताकि जब आप उन्हें ठुकराएं तो उन्हें ज्यादा बुरा न लगे।”