October 27, 2020

एक्सपर्ट से जानें जनरलाइज्ड एंग्ज़ाइटी डिसॉर्डर के बारे में साथ ही इसके लक्षण और उबरने के तरीके

हमारे इर्द-गिर्द ऐसे बहुत-से लोग हैं जिन्हें वास्तविक जिंदगी में कोई कष्ट नहीं होता, लेकिन बिना वजह की कल्पनाएं कर वे अपनी जिंदगी में दुखों को आमंत्रित करते रहते हैं। कई बार चिंता करने की प्रवृत्ति इतनी बढ़ जाती है कि उसका असर शारीरिक-मानसिक सेहत पर दिखाई देने लगता है। अगर वक्त पर इलाज का निर्णय न लिया जाए तो समस्या दिनोंदिन बढ़ती जाती है।

क्या हैं लक्षण
सामान्यतौर पर किसी दुख या परेशानी से जूझ रहा व्यक्ति जल्द ही खुद पर काबू पा लेता है लेकिन जीएडी में दुख या चिंता व्यक्ति के नियंत्रण से बाहर होती जाती है। तनाव को वह काबू नहीं कर पाता और अनहोनी की आशंका रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगती है। कई बार तनाव लंबे समय तक बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति हर समय अजीब सी बेचैनी में घिरा रहता है। न तो वह चैन से बैठ पाता है और न ही काम पर ध्यान केंद्रित होता है। रोग के लक्षण भावनाओं और व्यवहार में तो दिखते ही हैं, शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करने लगते हैं। बदन दर्द, नींद न आना या हर समय सोते रहना, थकान, पेट में दर्द, नॉजिय़ा, डायरिया, माइग्रेन आदि के रूप में लक्षण दिखाई देते हैं। कुछेक मामलों में जीएडी से ग्रस्त व्यक्ति के दिल की धड़कनें बढऩे लगती हैं। उसे सांस लेने में परेशानी महसूस होती है।

ये कारण होते हैं जिम्मेदार
बचपन के कड़वे अनुभव, माता पिता का व्यवहार या बीमारी, किसी प्रिय से बिछुडऩा, प्रोफेशनल लाइफ में तनाव, ब्रेकअप आदि इसके लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार होते हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिकी यानि पूर्व में परिवार के किसी सदस्य को मानसिक दिक्कत की वजह से भी यह समस्या उभरती है। थॉयराइड, दमा, हृदय रोग, डायबिटीज आदि की वजह से भी जीएडी हो सकता है।

ऐसे उबरें इससे
समस्या को पहचानना, समझना और उससे उबरने की कोशिश ही जीएडी से निज़ात पाने का उपाय है। किस तरह के प्रयास किए जाने चाहिए जानें यहां….

  • 1. चिंता और परेशानियों को तार्किक ढंग से समझने की कोशिश करें।
  • 2. रोजाना 30 मिनट तक सीधे लेटकर गहरी सांस लें, सोचें कि जो भी होगा, देखा जाएगा।
  • 3. मन जब परेशान हो, चिंता बढऩे लगे तो प्रकृति के सानिध्य में थोड़ा वक्त बिताएं।
  • 4. मनपसंद संगीत उदास-निराश मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
  • 5. शोध बताते हैं कि मनपसंद चीज़ें खान से मूड रिफ्रेश होता है।