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सरकार की किसानों के लिए स्कीम तैयार!

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi addresses after release a book "Moving On...Moving Forward: A Year in Office" published on experiences of M Venkaiah Naidu during his first year as Vice President of India and Chairman of Rajya Sabha, in New Delhi on Sunday, Sept 2, 2018. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI9_2_2018_000049B)

खेती के लिए खाते में डालेगी पैसे

नई दिल्ली, 11 जनवरी (एजेंसी)। मोदी सरकार किसानों को लुभाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, किसानों के लिए राहत पैकेज का प्रस्ताव तैयार हो गया, जिस पर जल्द फैसला हो सकता है। नए प्रस्ताव के मुताबिक किसानों के खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जाएंग। जिन किसानों के पास जमीन नहीं है उन्हें भी स्कीम में शामिल किया जा सकता है। किसानों की कर्जमाफी के बदले मोदी सरकार ने नया प्रस्ताव तैयार कर लिया है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, किसानों के खाते में सीधे रकम दी जाएगी। बिना जमीन वाले किसानों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। प्रस्ताव में ओडिशा, तेलंगाना मॉडल की झलक है। स्कीम के तहत हर परिवार के लिए रकम की अधिकतम सीमा तय की जाएगी।

प्रस्ताव में दो राज्य की झलक
प्रस्ताव में दो राज्य ओडिशा और तेलंगाना मॉडल की झलक है। तेलंगाना में हर बुआई सीजन से पहले 4000 रुपये प्रति एकड़ दी जाती है वहीं ओडिशा में प्रति परिवार 5000 रुपये किसानों को देने की स्कीम है। स्कीम के तहत किसानों को सरकारी खरीद कीमत सुनिश्चित की जाएगी।

एक पैकेज में कई तरह के फायदे
इस पैकेज में बीमा, कृषि कर्ज, आर्थिक मदद एक साथ देने पर विचार हो रहा है। सरकार व्यक्तिगत फायदा देने के बजाए परिवार को मदद देने पर विचार कर सकती है. इस स्कीम के तहत किसान परिवार के अलावा ज्यादा आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार को मदद देने की रणनीति बन रही है। स्कीम में छोटे, सीमांत और बटाईदारों या किराया पर किसानी करने वाले किसानों को फायदा देने पर जोर है। इस स्कीम के तहत किसानों शून्य प्रतिशत ब्याज पर लोन देने पर फैसला हो सकता है।

ओडिशा के कालिया मॉडल का अध्ययन
किसानों को राहत देने के लिए मोदी सरकार कालिया का अध्ययन कर रही है। कालिया मॉडल के तहत प्रति किसान परिवार 5 क्रॉप सीजन के लिए 25000 रुपये देने का प्रस्ताव है। सलाना एक मुश्त आर्थिक मदद देने पर विचार है. इसके साथ ही सरकार आर्थिक बोझ की समीक्षा कर रही है।