September 24, 2020

सुखी जीवन के लिए अपनाएं सेहत की ‘ए-बी-सी’

घूमने जाना, एक्सरसाइज करना, संतुलित भोजन लेना और डॉक्टर के निर्देश के अनुसार दवाइयां खाना- क्या आपका इन सब चीजों का रूटीन बिगड़ जाता है। कभी बैठकर सोचें कि आप अपनी या अपने परिवार की सेहत के बारे में कितने फिक्रमंद रहते हैं। सेहत आपकी प्राथमिकताओं में किस क्रम पर है। बीमार होने पर डॉक्टरों-अस्पतालों की दौड़ लगाना, अच्छे से अच्छा इलाज पर जमकर और जरूरत पडऩे पर कर्ज लेकर भी खर्च करना सेहत के प्रति फिक्रमंदी नहीं है। अपने आपको और अपने परिवार को स्वस्थ एवं चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए हमें सेहत को अपनी सबसे पहली प्राथमिकता बनाना होगा। अक्सर हम तब जागते हैं जब बड़ी देर हो चुकी होती है। रोज सुबह आधा घंटा पैदल घूमने जैसी अत्यंत सरल व बिना खर्च वाली स्वास्थ्यप्रद कसरत को हम अपनी किसी न किसी व्यस्तता या मजबूरी के बहाने टाल देते हैं और जब दिल का दौरा, बायपास ऑपरेशन या मधुमेह का झटका लगता है तब उसे अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं। ईश्वर ने अच्छे स्वास्थ्य को बड़ा सस्ता, बड़ा कम खर्चीला बनाया है। नियमित खान-पान, स्वास्थ्यप्रद भोजन, हल्का-फुल्का व्यायाम और तनावमुक्त जीवन आपको सबसे बड़ा सुख निरोगी काया दे सकते है। इसी को आप सबसे खर्चीला भी बना सकते हैं- अनियमित व असंयमित खान-पान, मदिरा पान, धूम्रपान, व्यर्थ के तनाव व आराम-तलब जिंदगी इसका रास्ता है। अब तय आपको करना है कि आप संकट का इंतजार करना चाहते हैं या संकट से पहले जागना? ऐसे में सबसे पहले इन परिस्थितियों से बचाव के लिए क्या करें? इसके लिए चिकित्सक एबीसी का फार्मूला अपनाने की सलाह देते हैं।

‘ए’ का अभिप्राय है, ‘अवेयरनेस’
यानी कोई भी समस्या जब पैदा होती है तो उसके प्रति हमें पूरी तरह से सजग-सचेत होना चाहिए। इसमें किसी की प्रेरणा हमारे लिए सहायक सिद्ध हो सकती है या हम अपना स्वयं का नजरिया सकारात्मक बनाएं जिससे हम समस्या को अपने पास फटकने से पहले ही उसे दूर भगा दें।

‘बी’ यानी ‘बैलेंसिंग’
यानी सही और गलत के बीच संतुलन कायम रखने की क्षमता का अपने भीतर पैदा करना।

‘सी’ का अभिप्राय है ‘कंट्रोल’
यानी विपरीत स्थितियों पर प्रतिक्रिया को नियंत्रण में रखना। इन तमाम चीजों के अलावा हम पर हमारी भावनाएं हावी होकर हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर न डालें, इसके लिए जरूरी है कि हम संतुलित भोजन लें, समय पर भोजन करें और पर्याप्त नींद लें। किसी भी तरह का नशा न करें। अपनी समस्या को लेकर अपने आपको परेशानी में न रखें।