September 23, 2020

ये उपाय अपनाकर बढ़ा सकते हैं मटर का उत्पादन

मटर में हानिकारक कीटों का प्रबंध खेत की मेड़ों की सफाई करें जिससे कीड़ों का आश्रय देने वाले पौधे पनप न पाएं। अंतरवर्ती फसल लगाएं, इससे मुख्य फसल पर कीट का प्रकोप कम होता है और प्राकृतिक क्षेत्रों की संख्या को सुरक्षित रखा जा सकता है। लाइट ट्रैप प्रपंच का उपयोग कर प्रतिदिन कीड़ों को नष्ट करें। खेत में फेरोमेन ट्रेप 8-10 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं। यदि आठ पतंगे प्रति ट्रेप प्रति रात्रि लगातार तीन रात मिले तो इसका नियंत्रण करना चाहिए। खेतों में पक्षी आश्रय स्थल (बर्ड पर्चर) अंग्रेजी के टी आकार की लकड़ी लगाएं। इल्लियों और फल छेदक कीट के नियंत्रण के लिए ट्रायकोकार्ड पांच लाख प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उपयोग करें। निर्धारित आर्थिक हानि स्तर होने पर ही कीटनाशक दवा का उपयोग करें। हरी इल्ली, फल छेदक कीट की रोकथाम हेतु बुवाई के 35-40 दिनों के बाद एचए एनपीव्ही. 250 एल.ई. प्रति हेक्टेयर के मान से शाम के समय छिड़काव करें। रस चूसक कीड़ों की रोकथाम के लिए नीम तेल या नीम अर्क पांच मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। पाइरेथ्राइड का प्रयोग फसल काल में केवल एक बार अंतिम समय पर करें। सिंथेटिक पाइरेथ्राइड का आवश्यकता से अधिक मात्रा का उपयोग या बार-बार छिड़काव सफेद मक्खी के प्रकोप को उग्र बना देता है। स्पाइनोसेड और इमामेक्टिन बेंजोएट का उपयोग भी फल छेदक कीट और हरी इल्ली के लिए कर सकते हैं।