November 25, 2020

सबसे पहले किसने रखा था करवा चौथ का व्रत

कैसे शुरू हुई इस व्रत की परंपरा, पढ़ें यह कथाएं

करवा चौथा, हर सुहागिन स्त्री के लिए अधिक महत्व रखता है। शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत करती हैं। यह परंपरा सदियों से से चली आ रही है। प्राचीन काल में देवियां भी अपने पतियों के लिए यह व्रत करती थीं। महाभारत काल में भी इस व्रत का प्रसंग मलिता है। आइए जानते हैं कि करवा चौथा की परंपरा कैसे शुरू हुई और किसने रखा था सबसे पहले यह व्रत।

इस तरह हुई थी करवा चौथ की शुरुआत
एक पौराणिक कथा के अनुसार, यह व्रत सबसे पहले देवी पार्वती ने अपने पति भोलेनाथ के लिए रखा था। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई थी। तब से लेकर अब तक शादीशुदा महिलाएं अपने पतियों के लिए यह व्रत करती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।

ब्रह्मदेव ने भी दी थी इस व्रत को करने की सलाह
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और राक्षसों के बीच युद्ध छिड़ गया था। यह युद्ध बेहद भयंकर था। देवताओं ने अपनी सारी ताकत लगा दी थी लेकिन वो जीत नहीं पा रहे थे। देवताओं पर राक्षस हावी हो रहे थे। तब ब्रह्मदेव ने सभी देवियों को करवा चौथ का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस व्रत के प्रभाव से उनके पति दानवों से यह युद्ध जीत जाएंगे। उनके आदेश पर सभी देवियों ने अपने पतियों के लिए कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन व्रत किया। इसके प्रभाव से सभी देवताओं ने युद्ध में जीत हासिल की। तब से ही करवा चौथ के व्रत की परंपरा शुरू हुई।

द्रौपदी ने भी रखा था करवा चौथ का व्रत
एक बार अर्जुन नीलगिरी पर्वत पर तपस्या कर रहे थे। तब पांडवों पर कई तरह के संकट आने लगे। इसके लिए द्रौपदी ने श्रीकृष्ण से मदद मांगी। श्रीकृष्ण ने कहा कि वो कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन करवा का व्रत करें। कृष्ण जी के कहे अनुसार द्रौपदी ने व्रत ने किया और इसके प्रभाव से पांडवों को संकटों से मुक्ति मिल गई।