September 25, 2020

मानसून मेहरबान घाटियां हुई गुलजार

भारत में मानसून और बारिश का मौसम वास्तव में सबसे अच्छा प्राकृतिक एवं मनमोहक होता है। नदियां पूरे जोरों पर होती हैं। कहते है लम्बी नींद के बाद मानसून में पहाड़ उठ जाते है और मॉनसून में जगह-जगह घाटी में झरने और शानदार झीलों के बहने की आवाजे आने लगती है। यही घाटियां, झरने और झीले लोगों के लिए पर्यटन के प्रमुख केन्द्र बन जाते है। पर्यटकों से ये घाटियां गुलजार हो जाती है। ऐसी ही देश में कुछ पर्यटन स्थल है, जिनसे हम आपको अवगत करवाएंगे। ताकि जब कभी आप मानसून सीजन या उसके आस-पास उन राज्यों में जाएं तो इन्हे देखने न भूले।

दूध सागर
गोवा के भीड़ भाड़ से भरी बीच, बाजार एवं क्लबो की दुनिया से दूर दूध सागर की यह यात्रा साहसिक एवं रोमांचकारी भरी दुनिया हैं। इस जलप्रपात (झरना) की उत्पत्ति कर्नाटक और गोवा सीमा के पास माण्डवी नदी पर है। यह गोवा का सबसे ऊँचा तथा भारत में सबसे ऊंचे जलप्रपातो में 5वें स्थान पर है। यह जलप्रपात पश्चिमी घाट के फाल्स भगवान महावीर वन्यजीव अभ्यारण्य और मोल्लेम राष्ट्रीय उद्यान के बीच स्थित है। इस झरने का पानी 310 मीटर ऊँचाई से होकर पर्वत के बड़े घेरे में बिखर जाता है और इतना स्वच्छ व निर्मल पानी नीचे गिरता है जिससे दूधिया रंग का प्रतीत होता है यही वजह है कि इसका नाम दुध सागर जलप्रपात (दूध का समुद्र) रख दिया गया। यह देशी व विदेशी सभी पर्यटकों का पसंदीदा स्थान बन गया है। यहां पे आसानी से सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है जो मोल्लेम राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों से होकर गुजरती है।

ऊंचाई से गिरकर भी वापस ऊपर जाता है पानी (नानेघाट रिवर्स वॉटरफॉल)
मुंबई फिल्म सिटी के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर है। जबकि इसके आस-पास भी कई ऐसी जगह हैं, जो अपनी रहस्यों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इनमें एक स्थान नानेघाट है, जो रिवर्स वॉटरफॉल के लिए जाना जाता है। बरसात के मौसम में इसकी खूबसूरती देखने लायक होती है। यह रिवर्स वॉटरफॉल महाराष्ट्र राज्य में स्थित है जो कोंकण समुद्र तट और जुन्नार नगर के बीच है। पुणे से इसकी दूरी तकरीबन 150 किलोमीटर है। जबकि मुंबई से इसकी दूरी 120 किलोमीटर है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब ऊंचाई पर कोई वस्तु फेंकी जाती है, तो वह गुरुत्वाकर्षण की वजह से नीचे धरती पर आ जाती है। वॉटरफॉल भी गुरुत्वाकर्षण के नियमों का पालन करता है। हालांकि, नानेघाट जलप्रपात गुरुत्वाकर्षण के अधीन नहीं है, बल्कि गुरुत्वाकर्षण के नियमों के विपरीत काम करता है। घाट की ऊंचाई से झरना नीचे गिरने के बजाय ऊपर आ जाता है। इस दृश्य को देख आप दंग रह जाएंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है? इस बारे में विज्ञान का कहना है कि नानाघाट में हवा बेहद तेज चलती है। इस वजह से जब वाटरफॉल नीचे गिरता है तो वह हवा के चलते उड़कर ऊपर आ जाता है।

भीमलत झरना
राजस्थान के बूंदी-भीलवाड़ा जिले की सीमा पर स्थित भीमलत झरना बांध इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यह बूंदी जिले में आता है और यहां एक प्राचीन भीमतल महादेव का मंदिर है। दरअसल, इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडव यहां अज्ञातवास के दौरान आए थे। इस दौरान पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए भीम ने अपने पैर को जमीन पर मारा तो वहां जलधारा फूट पड़ी। यह जलधारा आज भी बह रही है। इस कारण इस स्थान को भीमतल कहा जाता है। कोटा रेलवे स्टेशन से बूंदी शहर 35 किलोमीटर दूर है, जो कि निकटतम रेलवे स्टेशन है। भीमलत के आसपास इस स्थान की प्रसिद्ध डिश दाल बड़े, जूस, गट्टे की सब्जी, दाल बाटी चूरमा खस्ता फ्राई जैसे प्रमुख व्यंजन का मजा ले सकते है।

कुंचिकल झरना
यह भारत का सबसे ऊँचा झरना है। इसके ऊँचाई लगभग 1493 फीट है। कुंचिकल झरना कर्नाटक राज्य के उडुपी-शिमोगा जिले की सीमा पर वराही नदी पर स्थित है। वराही नदी कर्नाटक के जल विद्युत परियोजना का प्रमुख स्रोत है। झरने को स्थानिय लोग कुंचिकल अब्बे के नाम से भी जानते है। पर्यटको के लिये यह झरना मानसून के समय कुछ महिनों के लिए खोल दिया जाता है। इस नदी के साथ बहने वाली अन्य कई नदियां मानसून के दौरान यहाँ के कई झरनों के संग मिल जाती है। इसलिए मानसून में इस झरने के आस पास और कई छोटे झरने बहते देखते हैं। यह नज़ारा पर्यटकों को यहां तक खींच लाता है। बैंगलुरू से यहां तक पहुंचने में लगभग 8 घंटे का सफर तय करना पड़ता है।

मेनाल झरना
मेनाल झरना राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कोटा शहर को चित्तौडग़ढ़ और उदयपुर के साथ जोडऩे वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मांडलगढ़ कस्बे में है। इसके पास एक पुराना मंदिर है, जो हूबहू खजुराहो मंदिर की तरह दिखता है। इसलिए इस मंदिर को राजस्थान का मिनी खजुराहो मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ भी खजुराहो की तरह दिवार पर मुर्तिया बनी है जो की कामसूत्र के कई आसनों को दर्शाती है। वैसे तो यहाँ पुरे साल पर्यटक आते है पर घुमने का सबसे बढिय़ा मौसम है बरसात का मौसम यानी अगस्त और सितम्बर महिना इस दौरान यहां काफी तेज झरना निचे की और गिरता है जो की लगभग 100 फुट की ऊंचाई से गिरता है।