Wed. Jul 17th, 2019

प्रीनेटल योग करेंगी तो शिशु से बढ़ेगा जुड़ाव और प्रेग्नेंसी पेन हो जाएगा गायब

इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि ‘प्रीनेटल योगा’ गर्भवती महिलाओं के शारीरिक और मानसिक तनाव को दूर करने के लिये योग का एक बेहतरीन प्रकार है। इससे मितली, थकान, कमजोरी, मूड स्विंग, हॉर्मोन्स का असंतुलन, सांस लेने में परेशानी, गैस की समस्या और पेट में भारीपन जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है। प्रीनेटल योगा से शरीर को अनगिनत फायदे मिलते हैं, लेकिन मानसिक और आध्यत्मिक सेहत का क्या? हालांकि, इससे दोनों तरह की सेहत भी इससे मिलती है! यह होने वाली मां को उस यात्रा के लिए तैयार करने में मदद करता है जोकि दुनिया में एक नई जिंदगी का स्वागत करने के लिए आपका इंतजार कर रही है। यह भावी मॉम को मातृत्व की दुनिया में कदम रखने और इस सफर के दौरान आने वाली अनेक जिम्मेदारियों को बखूबी संभालने के लिए मानसिक ताकत देता है।
योग और ध्यान आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ को बहुत ज्यादा प्रभावित करते हैं, इसलिये जब प्रेग्नेंसी के दौरान इसका अभ्याास किया जाता है तो इससे मां को और ज्यादा सुकून और संतुष्टि का अहसास होता है। गर्भवती महिलाओं को बेचैनी और घबराहट महसूस होना आम है, खासतौर से जो पहली बार मां बन रही हैं। कई ऐसे योग आसन और प्राणायाम हैं जिनका अभ्यास हर ट्राइमेस्टरर में किया जाना चाहिये। अगर आप लंबे समय से योगा का अभ्यास करती आ रही हैं तो गर्भावस्था के दौरान होने वाले प्राकृतिक बदलाव आसान और ज्यादा सहज हो जायेंगे। अगर आपने अभी-अभी योग करना शुरू किया है तो आपको इसे धीरे-धीरे करने की जरूरत है और आपको एक ट्रेनर चाहिए या फिर योगा क्लास में शामिल हो जायें तो यह आपके लिये आसान होगा और आप प्रीनेटल योगा के सफर को शुरू कर पायेंगी। प्रेग्नेंट महिलाएं जो अत्यधिक मरोड़, कमर दर्द और जोड़ों में सूजन जैसी जिन आम समस्याओं का सामना करती हैं, उन्हें प्रीनेटल योगा से आराम मिलता है। सहजता के साथ योगा करने से दर्द जादू की तरह गायब हो जाता है। जब आप अभ्यास शुरू करे हैं तो आपको यह बात दिमाग में रखनी चाहिये कि हमेशा प्रोफेशनल की सलाह लें। यहां कुछ आसन दिये गये हैं जिससे आपको बेहतर और सहज गर्भावस्था में मदद मिल सकती है।

विपरीत करणी आसन (लेग्स अप वॉल पोज)
यह आसन हमारे सबसे पसंदीदा आसनों में से एक है। इस आसन से टखनों के आस-पास के दर्द और सूजन में राहत मिलती है। यह आसन राहत पहुंचाता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। आप दिन में कई बार इस आसन का सहारा लेती हुई दिखेंगी!

बालासन (चाइल्ड पोज)
दृढ़ता देने वाला यह आसन कई लेवल पर आपको हील करता है और ताजगी प्रदान करता है। इस अवस्था में आप भ्रूण की स्थिति में होती हैं, जो आगे आपको बच्चे से जोड़ती है।

बद्ध कोणासन (बाउंड एंगल पोज)
प्रेग्नेंसी के दौरान यह सबसे आरामदायक अवस्था होती है, क्योंकि इसमें आपको अपने पेट के लिये जगह मिलती है, लचीलापन बढ़ता है और आपकी मसल्स को आराम मिलता है और उनकी स्ट्रेचिंग होती है।

शवासन (कॉर्प्सं पोज)
इस मुद्रा का आप जितना चाहें उतना आनंद ले सकती हैं, प्रेग्नेंसी में आगे आने वाले महीनों में आपको पीठ के बल लेटने में परेशानी आ सकती है। इस मुद्रा में जितना मानसिक और शारीरिक आराम मिलता है वह अद्भुत है। शवासन की मुद्रा आपको नई एनर्जी देती है और आपकी प्रेग्नेंसी के दिन और ज्यादा सहज हो जायेंगे।

मार्जरासन (कैट-काउ पोज)
मार्जरासन से होने वाली मांओं की बेहतर स्ट्रेचिंग होती है और इससे कमर दर्द में राहत मिलती है। और हां, इससे कमर के ऊपरी हिस्से और शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में मदद मिलती है।

वीरभद्रासन (वारियर पोज)
वीरभद्रासन के आसन 1 और 2 से पैरों तथा जोड़ों को काफी मजबूती मिलती है, इससे आत्मविश्वा स और बढ़ता है और जैसा कि इस आसन का नाम है साहस और हिम्मत भी बढ़ती है।

प्रेग्नेंसी एक खूबसूरत प्रोसेस होती है, जहां एक लड़की मां के रूप में परिवर्तित होती है। यह शारीरिक, भावनात्मथक और आध्यात्मिक रूप से काफी बड़ा बदलाव होता है। योग और ध्यान एक खूबसूरत मार्ग पर ले जाते हैं जहां आपको निश्चित रूप से एक संपूर्ण गर्भावस्था का अनुभव मिलता है तथा डिलीवरी सेफ और सुकूनभरा होता है। आपको प्रेग्नेंसी की अनेकानेक शुभकामनाएं!