Wed. Jul 17th, 2019

जरूरी है बच्चों की रिस्पैक्ट का ध्यान रखना

बच्चे कच्ची मिट्टी समान होते हैं। उन्हें क्या रूप देना है यह आप पर निर्भर करता है। बड़ा हो कर बच्चा अच्छे व्यक्तित्व का स्वामी बने, उन्नति करे और आप का नाम रोशन करे यह चाह हर मांबाप को होती है। मगर ऐसा मुमकिन तभी होगा जब आप शुरू से बच्चे की अच्छी परवरिश पर ध्यान देंगे। अच्छी परवरिश के लिए दूसरी बातों के साथसाथ यह बात भी काफी अहम है जिसे अकसर मातापिता नजरअंदाज कर जाते हैं और वह है बच्चों को रिस्पैक्ट देना।

बच्चे को कभी उस के छोटे भाई या बहन के सामने न डांटें
यदि आप के बच्चे ने कोई काम आप के मनमुताबिक नहीं किया या उस ने कोई शरारत की, नंबर अच्छे नहीं आए या फिर उस के झूठ बोलने पर आप को गुस्सा आया हो, तो बात कितनी भी बड़ी हो पर बच्चे को कभी उस के छोटे भाईबहनों के सामने अपमानित न करें, क्योंकि छोटा भाई या बहन जो बड़े को आप से डांटमार खाता देख रहा है, समय आने पर वह भी बड़े की कद्र करना छोड़ देगा। छोटे भाई या बहन की नजर में बड़े का सम्मान घट जाएगा। वह बड़े भाई या बहन का मजाक उड़ाएगा जिस से बड़े के मन में कुंठा बैठती जाएगी। इसलिए यदि बड़े बच्चे को कुछ कहना है तो छोटे के सामने नहीं, बल्कि अकेले में कहें।

बच्चे को आप कह कर पुकारें
अकसर हम देखते हैं कि कुछ संभ्रांत परिवार के लोग अपने बच्चे को शुरू से ही आप कह कर पुकारते हैं जैसे आप ने क्या खाया, आप कहां गए, क्या सीखा आप ने वगैरह-वगैरह। इस से बच्चे के अंदर शिष्ट और सभ्य व्यवहार की नींव पड़ती है। आप बच्चे से तूतड़ाक कह कर बात करेंगे तो कल को वह दूसरों से और हो सकता है कि आप से भी इसी लहजे में बात करने लगे। इस से खुद आप को दूसरों के आगे लज्जित होना पड़ सकता है।

दूसरों के आगे आपा न खोएं
मान लीजिए बच्चे ने आप की कोई चीज खो दी या कोई बड़ी गलती कर दी जिस के बारे में आप को किसी और से पता चलता है, तो खबर मिलते ही एकदम बच्चे पर चीखनेचिल्लाने लगें यह उचित नहीं। लोगों के बीच बच्चे को कभी अपमानित न करें। अकेले में उस से बात करें। एकदम आपा खोने के बजाय बच्चे को उस के द्वारा की गई गलती के बारे में बताएं और फिर उस का जवाब सुनें। हो सकता है परिस्थितिवश ऐसा हुआ हो। उसे अपने बचाव का मौका दें। उस का पक्ष सुनने के बाद फैसला लें कि बच्चे की गलती है या नहीं। यदि उस की गलती है भी तो उस से मारपीट करने के बजाय उसे तार्किक तरीके से समझाएं। उसे अपनी गलती का एहसास कराएं और वादा लें कि वह आगे ऐसा नहीं करेगा। प्यार से समझाई गई बात का असर बहुत गहरा पड़ता है, जबकि मारपीट कर समझाई गई बात बच्चे में क्षोभ और विद्रोह के भाव पैदा करती है या फिर वह डिप्रैस्ड रहने लगता है।

बच्चे की कमियां न गिनाएं
हर समय बच्चे को नाकारा, आलसी, बेवकूफ, जाहिल जैसे शब्दों से न नवाजें। आप उसे जितना ज्यादा झिड़केंगे या उस की कमियां गिनाते रहेंगे उस के उतना ही ज्यादा गलत रास्ते पर जाने की संभावना बढ़ती जाएगी। कई घरों में मांबाप हर समय बच्चे को कोसते रहते हैं। बाहर वालों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के आगे भी उस की कमियों का बखान करते रहते हैं। इस से बच्चे के अंदर नकारात्मक सोच विकसित होती है। इस के विपरीत यदि मांबाप बच्चे की छोटीबड़ी उपलब्धियों का जश्न मनाएं, दूसरों के आगे उस की तारीफ करें, उस के अंदर की खूबियों को बढ़ाचढ़ा कर बताएं तो बच्चे के अंदर सकारात्मकता बढ़ती है। उस के अंदर और अच्छा काम कर अधिक तारीफ पाने की लालसा जगती है, उस के मन में क्षोभ, ग्लानि या प्रतिस्पर्धा के बजाय उत्साह, लगन और स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना प्रबल होती है।

बच्चे की इच्छा को मान दें
हर बच्चा दूसरे से अलग होता है। हर बच्चे में अलगअलग खूबियां होती हैं, अलगअलग हुनर होते हैं। बच्चे में जो हुनर है, उसे जो करना पसंद है, उस की भविष्य में जो बनने की इच्छा है उसे तरजीह दें। उसे वही बनने दें जो वह बनना चाहता है। कई घरों में बच्चे की इच्छा यह कह कर दबा दी जाती है कि वह छोटा है। उसे भलेबुरे का ज्ञान नहीं। पर ऐसी प्रवृत्ति सही नहीं। बच्चे की जिंदगी पर अपना अधिकार न जमाएं। उसे पूरे सम्मान के साथ अपनी जिंदगी और जिंदगी से जुड़े फैसले लेने दें ताकि उम्र बढऩे के बाद उस के अंदर घुटन, छटपटाहट, फ्रस्ट्रेशन और गुस्से की ज्वाला नहीं, बल्कि संतुष्टि, खुशी, अपनत्व और प्रेम की धारा बहे। वह आप को भी प्रेम दे और दूसरों को भी।

बच्चे का नाम न बिगाड़ें
अकसर माता-पिता या रिश्तेदार बच्चे के नाम को बिगाड़ कर पुकारते हैं जैसे चंद्र को चंदर, देव को देवू, मीनल को मिनुआ आदि। उन की किसी बाहरी कमी के आधार पर भी उस नाम से पुकारने लगते हैं जैसे- बच्चा काला है तो कालू, मोटा है तो मोटू, छोटा है तो छोटू वगैरह। अत: भूल कर भी कभी बच्चे को ऐसे नामों से न पुकारें उलटा यदि कोई परिचित या रिश्तेदार ऐसा करता है तो उसे तुरंत ऐसा करने को मना कर दें। बिगड़े नाम के साथ बच्चे का व्यक्तित्व भी बिगड़ सकता है। हमेशा बच्चे को उसी नाम से पुकारें जैसा आप उसे देखना चाहते हैं जैसे हर्ष, आशा, निहाल, प्रथम जैसे अच्छे अर्थ वाले नाम बच्चे के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।