Fri. Aug 7th, 2020

वर्कफ्रॉम होम में बेड पर बैठकर काम करना है नुकसानदेह

हेल्दी रहने के लिए ये तरीके अपनाएं

लॉकडाउन के समय से बहुत से ऑफिसों में वर्कफ्रॉम होम की शुरुआत हुई थी और अभी भी यह सिलसिला जारी है। इस समय में घरों की स्थितियां पूरी तरह से बदली हुई हैं। ज्यादातर महिलाएं खुद ही घर का सारा काम मैनेज कर रही हैं। ऐसे में उनके ऊपर वर्कलोड काफी ज्यादा है। कुकिंग और घर की सफाई जैसे कामों में थक जाने के बाद कई महिलाएं सुबह देर से सोकर उठती हैं और इसके बाद वे सीधे बेड से ही ऑफिस का काम शुरू कर देती हैं। हालांकि इससे काम तो सही समय पर शुरू हो जाता है, लेकिन बेड पर बैठे रहने से हेल्थ पर बुरा असर हो सकता है। एक ग्लोबल स्टडी में पाया गया है कि 70 फीसदी प्रोफेशनल्स बेड पर बैठ-बैठे ही वर्कफ्रॉम होम कर रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेड पर बैठकर काम करने से पीठ को सहारा नहीं मिल पाता। लैपटॉप पर काम करते हुए ज्यादातर महिलाएं आगे की तरफ झुककर काम कर रही होती हैं। इससे द्वह्वह्यष्द्यद्ग ह्यश्चड्डह्यद्व, बैक पेन या पैरों में दर्द की शिकायत हो सकती है। एक ही पोश्चर में दिनभर बैठे रहने पर स्लिप डिस्क की नौबत भी आ सकती है।

बिगड़ जाता है पोश्चर
बेड आराम करने और सोने के लिए बना होता है। बेड पर गलत पोश्चर में बैठने से पीठ दर्द की समस्या हो सकती है। अगर आप देर रात तक काम कर रही हैं तो स्क्रीन की तरफ लगातार देखने रहने से भी नींद आने में भी मुश्किल हो सकती है।

इस तरह रहें हेल्दी

  • 30 मिनट का वर्कआउट
    वर्कफ्रॉम होम के दौरान आराम से काम करने के लिए वर्किंग शुरू होने से पहले या काम खत्म करने के बाद कम से कम 30 मिनट के लिए हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। इससे आपके शरीर में खून का प्रवाह सामान्य बना रहेगा और आप अच्छा महसूस करेंगी।
  • बीच-बीच में लें ब्रेक
    सुनिश्चित करें कि आप अपनी सीट पर कई घंटों तक लगातार बैठकर काम ना करें। हर आधे घंटे पर 5 मिनट का ब्रेक लेने से आपको अकडऩ या शरीर में दर्द की समस्या नहीं होगी।
  • सही चेयर का इस्तेमाल करें
    कंफर्टेबल रहने के लिए सुनिश्चित करें कि चेयर में बैक सपोर्ट हो। आप चाहें तो आराम के लिए कुशन भी लगा सकती हैं।
  • लैपटॉप सही तरह से रखें
    इस बात का ध्यान रखें कि लैपटॉप बहुत ज्यादा ऊंचाई पर ना हो। इससे काम करते हुए गर्दन पर प्रेशर नहीं पड़ेगा और गर्दन में दर्द या अकडऩ की समस्या नहीं होगी।

रात में सोने में हो सकती है मुश्किल
बेड पर बैठकर काम करने पर दिमाग में काम और आराम के बीच का फर्क खत्म हो सकता है। इससे रात में नींद आने में मुश्किल महसूस हो सकती है। आराम करने की जगह पर काम करने से रात में भी वर्किंग वाली फीलिंग आ सकती है, जबकि रिलैक्स करते हुए ऐसा नहीं होना चाहिए। लगातार बेड पर बैठे रहने से गर्दन और पीठ में अकडऩ आ सकती है। इससे भी रात में सोने में परेशानी महसूस होती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ष्ठद्ब1द्बह्यद्बशठ्ठ शद्घ स्द्यद्गद्गश्च रूद्गस्रद्बष्द्बठ्ठद्ग के अनुसार जिस जगह पर आराम किया जाता है, वहां काम नहीं करना चाहिए। साथ ही लैपटॉप, टीवी और काम से जुड़े सामान को बेडरूम से बाहर रखना चाहिए ताकि बेडरूम को दिमाग रिलैक्स करने की जगह से असोसिएट कर सके। सबसे अच्छा ये रहता है कि टेबल पर बैठकर काम किया जाए या बेड से अलग किसी जगह पर बैठा जाए और बेड को सिर्फ सोने के काम में लाया जाए।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
‘आजकल ज्यादातर बैंकिंग और आईटी सैक्टर वाले लोग वर्कफ्रॉम होम में बेड पर बैठकर काम कर रहे हैं। वे टेबल और कुर्सी पर काम नहीं कर रहे हैं। इससे समस्या ये होती है कि ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और पीवीटी यानी कि पोर्टल वेन थ्रॉम्बोसिस का खतरा बढ़ता है। इससे डाइजेशन में समस्या आती है, फैट और कोलेस्ट्रोल बढ़ता है, जिससे वेट गेन की समस्या होती है। एक्सरसाइज नहीं हो पाने की वजह से हिप ज्वाइंट्स इन्वॉल्वमेंट हो रहा है और लोअर बैक में दर्द की समस्या बढ़ रही है। बेड पर बैठे रहने की वजह से शरीर में ठीक तरह से ऑक्सीजन नहीं जा पाती। इससे माइंड पूरी तरह से एलर्ट नहीं रह पाता। वातावरण नहीं बदलने की वजह से डिप्रेशन की समस्या भी बढ़ रही है।’

डॉ. ए के शुक्ला, सीनियर कंस्टलेंट फिजीशियन